निर्दलीय व पैनल उम्मीदवारों पर बढ़ी टेंशन (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
गढचिरोली

निर्दलीय व पैनल उम्मीदवारों की बढ़ी टेंशन, प्रत्यक्ष जनसंपर्क पर ज़ोर, मुद्दों पर ठोस चर्चा का अभाव

Independent Candidates: गड़चिरोली नगर पालिका चुनाव में अपक्ष व पैनल उम्मीदवारों की टेंशन बढ़ी। चुनाव चिन्ह में देरी से प्रचार प्रभावित, प्रत्यक्ष जनसंपर्क तेज़ है लेकिन मुद्दे गायब है।

आंचल लोखंडे

Gadchiroli Municipal Election News: गड़चिरोली नगर पालिका चुनाव में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन अपक्ष एवं पैनल के उम्मीदवारों को अब तक चुनाव चिन्ह न मिलने के कारण उनके प्रचार में भारी दबाव देखने को मिल रहा है। बुधवार को चिन्ह वितरण के बाद केवल चार दिनों का समय बचेगा, ऐसे में प्रभावी प्रचार कैसे किया जाए, इसे लेकर उम्मीदवारों में चिंता बढ़ गई है। गड़चिरोली, आरमोरी और देसाईगंज पालिका क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी चरम पर है। प्रमुख मार्गों, चौकों और मोहल्लों में उम्मीदवारों का जनसंपर्क अभियान तेज़ हो गया है। इस बार कई नए चेहरे भी मैदान में हैं जिससे मुकाबला रोमांचक और कड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं।

इस चुनाव में पोस्टरबाज़ी और छोटी सभाओं की तुलना में प्रत्यक्ष जनसंपर्क को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। उम्मीदवार सुबह से देर रात तक घर-घर जाकर, दुकानों, चौक-चौराहों और चाय की टपरियों पर लोगों से मिल रहे हैं। हालांकि अधिकांश उम्मीदवार “सहयोग दें, समर्थन दें” जैसे सामान्य आग्रह तक ही सीमित दिख रहे हैं। जलापूर्ति, नाली व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सड़क मरम्मत और शहरी सुविधाओं जैसे मूल मुद्दों पर ठोस योजनाएँ सामने नहीं आ रही हैं।

सहायता से प्रचार: कार्यकर्ताओं की कमी उजागर

कई उम्मीदवारों के पास कार्यकर्ताओं की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। ऐसे में वे दैनिक मज़दूरों की मदद से ध्वज, पोस्टर और प्रचार सामग्री लेकर गलियों में घूमने का काम करवा रहे हैं। इससे चुनावी प्रबंधन की क्षमता में असमानता भी उजागर हो रही है।

सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा हथियार

युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग हो रहा है। फेसबुक लाइव, इंस्टाग्राम रील्स, व्हाट्सऐप स्टेटस, डिजिटल स्लोगन, वीडियो डॉक्युमेंट्री और आकर्षक ग्राफिक्स की मदद से प्रचार को गति दी जा रही है। स्वतंत्र उम्मीदवार भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूरा लाभ उठा रहे हैं।

मतदाता शांत, मगर सजग

मतदाताओं की प्रतिक्रिया सामान्यतः शांत लेकिन गंभीर दिखाई दे रही है। उनका साफ कहना है। “काम करने वाले को ही वोट मिलेगा”। युवा मतदाता शिक्षा, खेल सुविधाओं और रोजगार अवसरों पर ठोस आश्वासन की मांग कर रहे हैं।

कई प्रभागों में बहुकोणी मुकाबले की संभावना

राजनीतिक दल इस चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बना चुके हैं। अनुभवी नेताओं और नए प्रत्याशियों- दोनों की परीक्षा होने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव अगले पांच वर्षों में शहर के विकास की दिशा तय करेगा, इसलिए मतदाता भी उम्मीदवारों का गहन मूल्यांकन कर रहे हैं।

प्रचार सामग्री की भरमार, निगरानी सख्त

  • शहर में बैनर, फ्लेक्स, पोस्टर और स्टिकर्स की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।
  • आचार संहिता के पालन हेतु चुनाव आयोग की विशेष टीम लगातार गश्त कर रही है।
  • ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर भी सख्त निगरानी की जा रही है।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

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