Kilkari Program (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया) 
गढचिरोली

किलकारी ऑडियो कॉल सुनने में गड़चिरोली राज्य में चौथे नंबर पर, मातृ स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा

Gadchiroli Kilkari Program: केंद्र सरकार के 'किलकारी' कार्यक्रम में गड़चिरोली जिले ने जून 2026 में महाराष्ट्र में चौथा स्थान हासिल किया है।

आंचल लोखंडे

Gadchiroli Health Department: केंद्र सरकार के स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित 'किलकारी' कार्यक्रम में गडचिरोली जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जून 2026 में महाराष्ट्र में 'किलकारी' ऑडियो कॉल सबसे अधिक सुनने वाले जिलों की राज्य स्तरीय सूची में गडचिरोली ने चौथा स्थान प्राप्त किया है। इस सूची में वर्धा पहले, चंद्रपुर दूसरे और वाशिम तीसरे स्थान पर रहे, जबकि गडचिरोली ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद शीर्ष चार जिलों में अपनी जगह बनाई।

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुहास गाडे के मार्गदर्शन तथा जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा। प्रताप शिंदे के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए प्रभावी नियोजन और जनजागरण अभियान के परिणामस्वरूप यह सफलता मिली है। 'किलकारी' योजना के अंतर्गत पंजीकृत गर्भवती महिलाओं (ANC) और प्रसूता माताओं (PNC) को उनके मोबाइल फोन पर गर्भावस्था, पोषण, टीकाकरण, नवजात शिशु की देखभाल तथा मातृ स्वास्थ्य से संबंधित निःशुल्क ऑडियो संदेश भेजे जाते हैं।

संदेशों में संतुलित आहार

जून माह के दौरान जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की बड़ी संख्या में महिलाओं ने इन संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना, जिससे यह उपलब्धि संभव हुई। इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सीईओ सुहास गाडे ने कहा कि गडचिरोली जैसे आदिवासी एवं दुर्गम जिले में मातृ स्वास्थ्य संबंधी संदेशों के प्रति बढ़ती जागरूकता अत्यंत सराहनीय है।

आवश्यक जांच, टीकाकरण

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ। प्रताप शिंदे ने इस सफलता का श्रेय तालुका स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, आशा कार्यकर्ताओं तथा स्वास्थ्य कर्मियों को देते हुए कहा कि गृह भ्रमण के दौरान उन्होंने महिलाओं को 'किलकारी' कॉल का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि अब केवल कॉल उठाना ही नहीं, बल्कि पूरा संदेश सुनना भी सुनिश्चित किया जाएगा।

क्या है 'किलकारी' कार्यक्रम ?

  • गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं को मोबाइल पर निःशुल्क स्वास्थ्य संबंधी ऑडियो कॉल भेजे जाते हैं।
  • गर्भावस्था के चौथे महीने से लेकर बच्चे के एक वर्ष का होने तक प्रत्येक सप्ताह मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • संदेशों में संतुलित आहार, आवश्यक जांच, टीकाकरण, नवजात शिशु की देखभाल और सुरक्षित मातृत्व संबंधी जानकारी सरल भाषा में दी जाती है।
  • समय पर सही स्वास्थ्य सलाह मिलने से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में सहायता मिलती है।

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