

Yavatmal Maternal Health Monitoring: यवतमाल जिले में मातृ मृत्यु और बाल मृत्यु की बढ़ती घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1 अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच जिले में 27 मातृ मृत्यु और 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग में मार्च 2026 तक 368 बाल मृत्यु दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े न केवल चिंताजनक तो हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जनजागृति के चलते आंकडे कम होते नजर आ रहे हैं। स्थित्ति सुधारने के लिए प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं का डेटा ऑनलाइन एकत्र कर नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए थे।
हर सप्ताह जानकारी अपडेट करने के आदेश भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद यह प्रक्रिया कहीं केवल कागजों तक सीमित तो नहीं रह गई है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव की संख्या बेहद कम होना भी चिंता का विषय है। हर केंद्र के लिए प्रत्ति माह 10 प्रसव का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन 67 केंद्रों में से केवल 2 ही इस लक्ष्य को पूरा कर पाए हैं।
बाकी केंद्रों की स्थिति से यह सवाल उठता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल भी रही हैं या नहीं। प्रशासन ने अब प्रसव संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी तालुका स्वास्थ्य अधिकारियों पर डाल दी है लेकिन यह आदेश भी केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा या जमीनी स्तर पर बदलाव लाएगा, यह देखने वाली बात होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सुविधाओं, मानव संसाधन और जनजागरूकता में सुधार नहीं होगा, तब तक मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना मुश्किल है। जिले की स्वास्थ्य स्थिति को दशनि वाले 2021 से 2024 के आंकड़ों में कुछ सुधार जरूर दिखता है, लेकिन कई संकेतक चिंता बढ़ाने वाले हैं। क्रूड बर्थ रेट (CBR) 2022 में 14।36 से घटकर 2024 में 11।51 हो गया, जो जनसंख्या वृद्धि में कमी का संकेत है।
क्रूड डेथ रेट (CDR) 2021 में 8.90 से घटकर 2024 में 7.11 तक आया है। इन्फेंट मॉर्टलिटी रेट (IMR) 17.61 से घटकर 11.98 तक पहुंचा, जो कुछ हद तक सुधार दर्शाता है। मातृ मृत्यु दर के सबसे चिंताजनक 2020 में 46.29 से बढ़कर 2024 में 88.27 तक पहुंच गया। प्रसव के दौरान महिलाओं की मृत्यु दर में गंभीर वृद्धि हुई है, जो स्वास्थ्य सुविधाओं व समय पर उपचार की उपलब्धता पर सवाल उठाती है।
बड़े पैमाने पर की जा रही है जनजागृति जिला शल्य चिकित्सक डॉ. सुखदेव राठोड ने बताया कि जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित रूप से बाल और माता मृत्यु को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और बड़े पैमाने पर जनजागृति भी की जा रही है।
यहीं वजह है कि बाल व मातामृत्यु का प्रमाण अब धीरे धीरे कम होता जा रहा है। माता मृत्यु का प्रमाण साल 2023 में 35 था वह अब साल 2026 में 12 तक पहुंच गया है। वहीं बाल मृत्यु का प्रमाण 2024-25 में 399 था वह घटकर 368 तक आ गया है।
इस संदर्भ में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुभाष ढोले ने कहा कि माता और शिशु का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वारथ्य विभाग की योजनाओं का समय पर लाभ ले और नियमित जांच करवाएं, यवतमाल जिले में बढ़ती मातृ और शिशु मृत्यु दर केवल आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है, जब तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, पर्याप्त संसाधन और जनजागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक स्थिति में सुधार कठिन नजर आता है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मातृ और शिशु मृत्यु को रोकने के लिए लगातार व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं का नियमित टीकाकरण, समय-समय पर जांच, और हाई रिस्क मामलों की पहचान कर उनका विशेष ट्रैकिंग किया जा रहा है।
'कलर कोडिंग' पद्धति के जरिए जोखिम स्तर के अनुसार गर्भवती महिलाओं की पहचान की जा रही है। साथ ही नवजात शिशुओं के समय पर टीकाकरण और ANC (Ante Natal Care) स्कैन के माध्यम से गर्भावस्था की जटिलताओं को समय रहते पहचानकर उपचार किया जा रहा है।