गड़चिरोली में पेड़ों की कटाई (सौजन्य-नवभारत) 
गढचिरोली

गड़चिरोली के जंगलों पर 'कुल्हाड़ी' का वार! जड़ों में आग लगाकर पेड़ों को नष्ट कर रहे ग्रामीण, एक्शन की उठी मांग

Gadchiroli Forest Protection: गड़चिरोली में वनसंपदा पर गहराया संकट। अवैध पेड़ों की कटाई और जड़ों में आग लगाने से नष्ट हो रहे जंगल। समाजसेवी दीपक सुनतकर ने की सख्त कार्रवाई की मांग।

प्रिया जैस

Illegal Tree Felling: आदिवासी बहुल तथा घने जंगलों से घिरे गड़चिरोली जिले के वनसंपदा पर संकट छाया हुआ है। वनविभाग के अनदेखी के चलते ग्रामीण धड़ल्ले से जंगलों में घुसकर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई कर रहे है। वन कानून के प्रावधानों के तहत किसी भी आरक्षित वन जमीन पर पेड़ों की कटाई गैर कानूनी है। लेकिन आजकल लोगों द्वारा पेड़ों की जड़ों में आग लगाकर विशालकाय पेड़ नष्ट कर रहे है।

इसके साथ ही बड़े पेड़ों की कटाई शुरू होने से वनसंपदा पर चलती कुल्हाड़ी का संकट बढ़ रहा है। आमतौर पर ग्रीष्मकाल के शुरुआत में महुआ फूल व तेंदूपत्ता संकलन करने के लिए जंगलों में आग लगाई जाती है। जंगल में आग लगने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वनविभाग द्वारा गांव-गांव में जाकर लोगों में जनजागृति की जाती है। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में लोग जंगल से लकड़ियां भोजन पकाने के लिए घर ला रहे है।

जिससे अवैध पेड़ों की कटाई बढ़ गई है। गांव के खेत से सटी वन विभाग के आरक्षित जमीन के पेड़ तोड़े जा रहे है। जड़ों को जलाकर बड़े पेड़ों की कटाई की जा रही है। नितदिन बेशकीमती वनसंपदा नष्ट हो रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जमीन पर धराशायी हुए पेड़ दिखाई देते है। बेशकीमती वनसंपदा का व्यापक नुकसान हो रहा है। अनेक बार फैले कचरे को आग लगने से जंगल में दावानल लगता है।

इंधन के लिए लकड़ियों की कटाई

आदिवासी ग्रामीण सालभर भोजन पकाने के इंधन के तौर पर लकड़ियों का उपयोग करते है। जंगल में सूखी लकड़ियां व्यापक मात्रा में उपलब्ध होने के बावजूद अब ग्रामीणों द्वारा हरे-भरे पेड़ों को तोड़ना शुरू किया है। पेड़ों की जड़ से कुछ दूरी तक कुल्हाड़ी से वार कर जड़ों को आग लगाई जाती है। कुछ घंटों के पश्चात विशालकाय पेड़ धराशायी होते है। इसके पश्चात कुल्हाड़ी से पेड़ को काटकर इंधन के रूप में उपयोग में लायी जाती है।

मामले की ओर गंभीरता से ध्यान दें

जिले में ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र के जंगलों में अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई हो रही है। इसको रोकने के लिए वन विभाग को विशेष उपाययोजना करने की आवश्यकता है। विशेषत: इसमें प्रमुखता से लोगों में जनजागृति करना बेहद जरूरी है। वहीं अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई कर वन संपदा को नष्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर इस मामले को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

  • दीपक सुनतकर, समाजसेवी, अहेरी

कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत

अवैध पेड़ों की कटाई रोकने के लिए सरकार की ओर से लाभार्थियों को गैस कनेक्शन वितरित किए गए है। लेकिन इंधन के दाम बढ़ने से गैस पर भोजन पकाना असंभव हो रहा है। जिससे ग्रामीण अंचल के नागरिक इंधन के लिए जंगल के पेड़ों की कटाई कर रहे है। जंगल परिसर में जड़ से लेकर अलग हुए पेड़ जमीन पर गिरे नजर आ रहे है। इस ओर वन विभाग को गंभीरता से ध्यान देकर अवैध पेड़ों की कटाई करने वालों पर कार्रवाई करने की जरूरत है।

राज ठाकरे की रैलियों में भीड़, फिर क्यों नहीं मिलते वोट? MNS चीफ ने चुनाव आयोग और BJP पर लगाए गंभीर आरोप

TMC सिंबल फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से सोमवार तक मांगा जवाब, कहा- जल्दी निपटाओ मामला

एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते... मुख्य चुनाव आयुक्त पर मुकेश सहनी का विवादित बयान

सेवा संकल्प अभियान यात्रियों से पीएम मोदी की बातचीत, अनुभव सुनकर कहा- मैं भी आपके साथ-साथ चल रहा हूं

ग्रेटर नोएडा बस हादसे पर PM मोदी ने जताया दुख, मृतकों के परिवारों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार की मदद का ऐलान