भामरागड़ के नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पुलिया की मांग तस्वीर (सोर्स: नवभारत) 
गढचिरोली

गड़चिरोली:भामरागड़ के नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पुलिया की मांग पर आंदोलन की चेतावनी

Gadchiroli News: भामरागड़ के अतिदुर्गम गांवों में पुलिया न होने से बरसात में 12 गांवों का संपर्क टूट जाता है। प्रणय खुणे के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने जल्द निर्माण न होने पर तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी

रूपम सिंह

Bridge Construction Demand News: गड़चिरोली जिले की भामरागड़ तहसील के अतिदुर्गम एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की गंभीर समस्या उजागर हुई है। वर्षों से लंबित पड़ी मूलभूत मांगों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी के मद्देनज़र राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. प्रणय खुणे ने भामरागड़ तहसील के सुदूरवर्ती गांवों का दौरा कर प्रत्यक्ष रूप से हालात का जायजा लिया और स्थानीय नागरिकों से संवाद किया।

डॉ. खुणे ने तहसील के धोंडाराज, इरपणार, प्ररायणार एवं पेनगुंडा जैसे अत्यंत दुर्गम गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान ग्रामीणों ने एक स्वर में बताया कि क्षेत्र में यातायात के साधन अत्यंत सीमित हैं और बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। गांवों को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता एक बड़े नाले के ऊपर से होकर गुजरता है, जो मानसून के दौरान उफान पर रहता है।

ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में यह नाला लबालब भरकर तेज बहाव के साथ बहता है, जिससे लगभग 10 से 12 गांवों का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने, गर्भवती महिलाओं के इलाज, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन तथा रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। कई बार ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नाले को पार करना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

पुलिया की मांग पर आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इस नाले पर पुलिया निर्माण की मांग वे पिछले कई वर्षों से कर रहे हैं, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया। उनका कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद यहां के नागरिक भी समान विकास और सुविधाओं के हकदार हैं।

ग्रामीणों ने डॉ. खुणे के समक्ष स्पष्ट शब्दों में मांग रखी कि उक्त नाले पर तत्काल पुलिया को मंजूरी दी जाए और निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जाए। यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस चेतावनी से क्षेत्र में आंदोलन की संभावना प्रबल हो गई है।

डॉ. प्रणय खुणे ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और मौके की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल आवागमन का नहीं, बल्कि मानवाधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस विषय को संबंधित विभागों और प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाएंगे तथा पुलिया निर्माण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

इस दौरे से ग्रामीणों में कुछ उम्मीद जगी है, लेकिन अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो भामरागड़ तहसील के इन दुर्गम गांवों में आंदोलन की चिंगारी भड़क सकती है।

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