बारिश की कमी के कारण खेतों में पड‍़ रही दरारे। 
गढचिरोली

गडचिरोली जिले में येलो अलर्ट के बावजूद नहीं हुई बारिश, खेतों में पड़ने लगी दरारे

नागपुर के मौसम विभाग ने 7 जुलाई तक गडचिरोली जिले में बारिश की संभावना व्यक्त करते हुए यलो अलर्ट की घोषणा की थी। लेकिन इस कालावधि में किसी भी स्थान पर पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई है। जुलाई माह शुरू होने के बाद भी अब तक आवश्यक बारिश नहीं होने से जिले के धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है।

आकाश मसने

गडचिरोली: जिलेवासियों को अच्छी बारिश के लिए अब भी इंतज़ार करना पड़ेगा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अगले 3 दिनों तक पासिंग शॉवर ही मिलेंगे। जिले में बादल छाए रहते है लेकिन बारिश केवल कुछ मिनटों के लिए आती है और फिर रुक जाती है।

नागपुर के मौसम विभाग ने 7 जुलाई तक गडचिरोली जिले में बारिश की संभावना व्यक्त करते हुए यलो अलर्ट की घोषणा की थी। लेकिन इस कालावधि में किसी भी स्थान पर पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई है। जुलाई माह शुरू होने के बाद भी अब तक आवश्यक बारिश नहीं होने से जिले के धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है।

खेतों में पड़ रही दरारें

बुआई के बाद अब बारिश की आवश्यकता है। लेकिन बारिश पूरी तरह नदारद होने और तपती धूप निकल आने से खेतों में दरारें दिखाई देने लगी है। जिससे किसानों को अपनी फसलों को नवसंजीवनी देने अब जद्दोजहद उठानी पड़ रहीं है। गुरुवार रात और शुक्रवार को दिनभर जिले के किसी भी स्थान पर बारिश नहीं होने की जानकारी मौसम विभाग ने दी है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार और सोमवार को भी बारिश की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा सकता है। साथ ही बारिश की संभावना 60% तो तूफान की संभावना 36% बताई जा रही है।

किसानों की चिंता बढ़ी

बता दें कि गड़चिरोली जिला धान उत्पादक के रूप में परिचित है। जिले में किसी प्रकार की सिंचाई परियोजना नहीं होने के कारण स्थानीय किसान बारिश पर निर्भर रहकर अपने खेतों में खरीफ सत्र के दौरान बड़े पैमाने पर धान की फसल उगाते है। लेकिन इस वर्ष शुरूआती दौर से बारिश की बेरूखी से किसान में चिंता में दिखाई दे रहे है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा हैं, ऐसे किसानों ने अब रोपाई का कार्य भी शुरू कर दिया है। लेकिन जो किसान बारिश पर निर्भर हैं, ऐसे किसानों के खेतों में दरारें दिखाई देने लगी है। बोया गया धान अब पीला भी पड़ने लगा है। जिसे इस वर्ष भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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