Surjagarh Mines Tribal Women Employment: महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित और सघन जंगलों वाले गड़चिरोली जिले के सुरजागढ़ क्षेत्र से महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी अनूठी और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आ रही है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। जिन आदिवासी महिलाओं ने कभी गांव की पगडंडियों पर साइकिल तक नहीं चलाई थी, वे आज सुरजागढ़ की खदानों में 70 से 100 टन क्षमता वाले विशालकाय डंपर ट्रक्स, व्हील लोडर और सैकड़ों किलोमीटर लंबे ट्रेलर्स की स्टीयरिंग थामकर उद्योग जगत को हैरान कर रही हैं।
गड़चिरोली जिले के सुरजागढ़ अंचल में लॉयड्स मेटल एंड एनर्जी लिमिटेड द्वारा संचालित माइनिंग प्रोजेक्ट्स ने स्थानीय आदिवासी महिलाओं के जीवन में एक अभूतपूर्व क्रांति ला दी है।
सुरजागढ़ लौह अयस्क खदानों में कार्यरत स्थानीय आदिवासी महिलाओं की यह यात्रा दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास की मिसाल है। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, जब ये महिलाएं शुरुआत में परियोजना से जुड़ी थीं, तब इनमें से कई महिलाओं को साइकिल चलाना तक नहीं आता था।
आज वही महिलाएं खदानों के ऊबड़-खाबड़ और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर 75-टन से लेकर 100-टन क्षमता वाले भारी डंपर दौड़ा रही हैं। इतना ही नहीं, वे 200 से 300 किलोमीटर दूर तक भारी ट्रेलर्स चलाकर सामग्री का परिवहन भी सफलता पूर्वक कर रही हैं।
आदिवासी महिलाओं को भारी मशीनरी का कुशल ऑपरेटर बनाने के लिए लॉयड्स मेटल्स ने एक वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रशिक्षण ढांचा तैयार किया। महिलाओं को सबसे पहले अत्याधुनिक मोशन-सेंसर सिमुलेटर पर ट्रेनिंग दी जाती है। सिमुलेटर में सुरजागढ़ माइंस का ही वर्चुअल माहौल होता है, जिससे उनका शुरुआती झिझक और डर समाप्त होता है।
लगभग डेढ़ महीने की सिमुलेटर ट्रेनिंग के बाद महिलाओं को व्यावहारिक अनुभव (Practical Training) के लिए झारखंड भेजा जाता है। इसके बाद प्रत्यक्ष माइंस परिसर में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OGT) दी जाती है। शुरुआत 70-75 टन क्षमता वाले डंपर से होती है, और दक्षता सिद्ध होने पर उन्हें 100 टन व उससे अधिक क्षमता की मशीनें सौंपी जाती हैं।
यह बदलाव केवल गाड़ियां चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने महिलाओं के सामाजिक दृष्टिकोण को बदल दिया है। 12वीं और ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते-करते ये महिलाएं 2021 से लगातार भारी वाहनों का संचालन कर रही हैं।
लॉयड्स मेटल एंड एनर्जी लिमिटेड में काम करके अर्जित आय से गड़चिरोली जिले की ये महिलाएं न केवल अपने परिवारों को आर्थिक मजबूती दे रही हैं, बल्कि खुद के लिए टू-व्हीलर गाड़ियां और मनपसंद वस्तुएं खरीद रही हैं।
लॉयड्स मेटल्स का महिला सशक्तिकरण मॉडल केवल माइनिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी द्वारा संचालित गारमेंट यूनिट में 450 स्थानीय आदिवासी महिलाएं कार्यरत हैं। खदानों और प्लांट्स में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों की यूनिफॉर्म इसी यूनिट में इन्हीं महिलाओं द्वारा तैयार की जाती है।
लॉयड्स मेटल्स के इस परियोजनाओं में कार्यरत कुल कर्मियों में 85% लोग महाराष्ट्र के हैं। उससे भी बड़ी बात इनमें से अकेले 65% स्थानीय गड़चिरोली जिले के निवासी हैं। आकड़ों के मुताबिक जहां पहले गड़चिरोली जिले के स्थानीय परिवारों की मासिक आय मुश्किल से 5,000 रुपए थी, वहीं आज बढ़कर न्यूनतम मासिक वेतन ₹20,000 से ₹25,000 तक पहुंच गया है।