Gadchiroli Farmers Bullock Festival : गड़चिरोली जिले में आज पोला पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सूखे का संकट मंडरा रहा है, इसके बावजूद किसानों ने परंपरा और संस्कृति को कायम रखते हुए बैलों के पूजन की तैयारी पूरी कर ली है। पोले के लिए बाजारों में भी बैलों के श्रृंगार की सामग्री की जमकर खरीदारी हुई।
आज पोला पर्व पर गड़चिरोली के किसान अपने सालभर के साथी बैलों को सजाएंगे, उनकी पूजा करेंगे और कृतज्ञता जताएंगे। पोले की पूर्वसंध्या पर बाजारों में उमड़ी भीड़ ने किसानों के उत्साह की तस्वीर साफ कर दी।
गड़चिरोली जिले में आज पोला पर्व पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। पोला किसानों और उनके सच्चे साथी बैलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। खरीफ सीजन में फसलों की बुआई के बाद अब जिले में सूखे का संकट मंडरा रहा है। इसके बावजूद किसानों ने परिस्थितियों की चिंता को पीछे छोड़ते हुए पोला मनाने की तैयारियां की हैं।
सालभर खेतों में किसान के साथ मेहनत करने वाले बैलों को इस दिन विशेष सम्मान दिया जाता है। भले ही खेती में यांत्रिकीकरण बढ़ा है, लेकिन बैलजोड़ियों के साथ पोला मनाने की परंपरा आज भी ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
पोला पर्व की पूर्वसंध्या पर बैलों के कांधों की मलनी की परंपरा निभाई जाती है। सालभर खेतों में बोझ उठाने वाले बैलों के कांधों की इस दिन विशेष देखभाल की जाती है। पोला पर्व के दिन बैलों को काम से पूरी तरह आराम दिया जाता है।
सुबह बैलों को स्नान कराया जाता है और फिर उनका साज-श्रृंगार किया जाता है। उनकी पीठ पर आकर्षक झूल पहनाई जाती है। सींगों को बेगड़ से सजाया जाता है, जबकि सिर पर बासिंग, गले में कौड़ियों और घुंघरुओं की मालाएं पहनाई जाती हैं। इसके बाद विधि-विधान से बैलों का पूजन किया जाता है।
पोला पर्व पर बैलों को मीठी परणपोली का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। कई किसान इस दिन उपवास रखते हैं और शाम को अपने बैलों के साथ भोजन करने की परंपरा निभाते हैं। यह आयोजन किसान और बैल के बीच वर्षों से चले आ रहे संबंध और कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।
पोला पर्व को लेकर गड़चिरोली शहर समेत जिलेभर के बाजारों में भी बुधवार को काफी रौनक रही। ग्रामीण क्षेत्रों से किसान बड़ी संख्या में बाजार पहुंचे। बैलों के श्रृंगार की सामग्री, सजावटी सामान और पर्व से जुड़ी अन्य वस्तुओं की दुकानों पर भीड़ दिखाई दी। सूखे की चिंता के बावजूद किसानों के उत्साह ने पोला पर्व की पारंपरिक रंगत को बरकरार रखा है।