बेहतर छात्रावास  (सोर्सः सोशल मीडिया)
गड़चिरोली

Gadchiroli Ashram School: आदिवासी बच्चों के लिए बेहतर छात्रावास बनाने की मांग, आश्रम स्कूल बंद करने का आग्रह

Gadchiroli Ashram School: गड़चिरोली के मूल में आदिवासी विकास परिषद ने आश्रम स्कूलों की सुविधाओं पर सवाल उठाते हुए तहसील स्तर पर बेहतर आवासीय छात्रावास बनाने की मांग की।

आंचल लोखंडे

Gadchiroli Tribal Students: राज्य की सभी आश्रम स्कूलों को बंद कर आदिवासी विद्यार्थियों के लिए तहसील स्तर पर बेहतर सुविधाओं से युक्त आवासीय छात्रावास उपलब्ध कराए जाएं। आदिवासी बच्चों को भी अन्य विकसित समाज के बच्चों की तरह उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण स्कूलों और महाविद्यालयों में शिक्षा लेने का अवसर मिलना चाहिए। यह मांग आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष एवं नगरसेवक अशोक येरमे ने की। मूल के गांधी चौक में गड़चिरोली जिले के धानोरा तहसील स्थित जपतलाई आश्रम स्कूल में सर्पदंश से जान गंवाने वाली तीन बच्चियों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में येरमे ने अपनी नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि पहले दूर-दराज के क्षेत्रों में स्कूल उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर शिक्षा के लिए जाना पड़ता था। अब गांव-गांव में स्कूल उपलब्ध हैं। ऐसे में दूरदराज और निर्जन स्थानों पर चल रही आवासीय आश्रम स्कूलों की आवश्यकता नहीं रह गई है।

आबादीवाले क्षेत्रों में बनाएं आश्रमशाला

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का वास्तव में विकास करना है तो तहसील मुख्यालयों और बड़े आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर आवासीय छात्रावासों की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे विद्यार्थियों को अच्छी शैक्षणिक सुविधाओं वाले स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कई आश्रम स्कूल ऐसे स्थानों पर हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। किसी विद्यार्थी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे समय पर उपचार उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है।

शैक्षणिक प्रगति की जा सके

येरमे ने कहा कि देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आश्रम स्कूलों की सुविधाओं में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं देता। कई आश्रम स्कूलों में 300 से 400 विद्यार्थी निवास करते हैं। विद्यार्थियों के भोजन और निवास के लिए संस्थाओं को दी जाने वाली राशि बंद कर वह सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में जमा की जानी चाहिए, ताकि वे शैक्षणिक सामग्री, गणवेश और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर खर्च कर सकें। इससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

शिक्षकों की कमी

उन्होंने आश्रम स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। येरमे ने कहा कि कक्षा पहली से दसवीं तक संचालित आश्रम स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है। अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की पर्याप्त भर्ती नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी व्यवस्था में विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो

मोमबत्तियां जलाकर दी श्रद्धांजलि

मूल के गांधी चौक में शाम 7 बजे योगीराज पेंदाम की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भागवत कुंभरे, वासुदेव आत्राम, ज्योति कनाके, प्रियंका गेडाम, संपत कनाके और संगीता पेंदाम ने आदिवासी विकास विभाग एवं शासन की सुविधाओं को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के साथ अन्य समाजों के लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने सुनीता, दीपिका और अनु की तस्वीरों के सामने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन मनोहर मड़ावी ने किया। इस दौरान लक्ष्मण सोयाम सहित उपस्थित लोगों ने नारे लगाकर शासन व्यवस्था के प्रति विरोध जताया।

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