Gadchiroli Teacher Recruitment: गड़चिरोली जिले में 'पवित्र पोर्टल' के माध्यम से नियमित शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पेसा क्षेत्र की शालाओं में पिछले तीन वर्षों से ठेका पद्धति से कार्यरत 1,170 शिक्षकों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। सरकार के इस निर्णय से दुर्गम तथा आदिवासी क्षेत्रों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे ठेका शिक्षकों में भारी असंतोष और चिंता का माहौल है।
पेसा क्षेत्र की शालाओं में इन शिक्षकों की ठेका पद्धति से नियुक्ति की गई थी। उन्हें वर्ष में केवल 10 माह के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपये मानदेय दिया जाता था। इसके बावजूद इन शिक्षकों ने दुर्गम क्षेत्रों में विपरीत परिस्थितियों में अध्यापन कार्य के साथ-साथ विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाई। कई शिक्षक प्रधानाध्यापक तथा बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।
जिले में शिक्षकों के कुल करीब 1,200 पद रिक्त हैं। सरकार के नियमों के तहत इनमें से 80 प्रतिशत यानी 960 पद पवित्र पोर्टल के माध्यम से भरे जाने हैं। पहले चरण में 350 शिक्षकों की भर्ती पूरी हो चुकी है और ये शिक्षक सेवा में भी शामिल हो गए हैं। अब शेष 610 पद दूसरे चरण में भरे जाएंगे। ठेका पेसा शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने पिछले 3 वर्षों से इन्हीं रिक्त पदों पर पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य किया है। ऐसे में नियमित भर्ती प्रक्रिया में उन्हें अनुभव और सेवा अवधि के आधार पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कंत्राटी पेसा कृति समिति के जिला संगठक लोकेश बारसागड़े ने कहा कि पेसा क्षेत्र के रिक्त पदों पर ठेका शिक्षकों ने पिछले 3 वर्षों से अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्य किया है। सभी शिक्षको के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं भी हैं। इसलिए दूसरे चरण की भर्ती में संविदा शिक्षकों को प्राथमिकता देकर उन्हें नियमित नियुक्ति देने की मांग को लेकर सरकार के समक्ष लगातार प्रयास किए जा रहे है।
ठेका शिक्षकों का कहना है कि यदि उन्हें नियमित नियुक्ति का अवसर नहीं दिया गया तो वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने के बावजूद वे बेरोजगारी की स्थिति में पहुंच जाएंगे। इसलिए शासन को भर्ती प्रक्रिया में ठेका शिक्षकों के अनुभव और सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए उनके भविष्य के संबंध में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।