

Gadchiroli Education Department: केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले फंड का समय पर तथा निर्धारित उद्देश्य के अनुसार उपयोग होना चाहिए। इस फंड से किए गए कार्यों का ठोस परिणाम स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता में दिखाई देना चाहिए। विशेष रूप से आदर्श तथा पीएम श्री स्कूलों के लिए मंजूर फंड से किए गए कार्यों का मूल्यांकन कर लंबित कार्यों के कारणों का पता लगाया जाए तथा संबंधितों की जिम्मेदारी तय की जाए, ऐसे निर्देश राज्य के स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने दिए। जिला परिषद के सभागृह में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में वे बोल रहे थे।
बैठक में विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे, ग्रामीण विकास यंत्रणा के प्रकल्प संचालक राहुल कालभोर, माध्यमिक शिक्षा अधिकारी वासुदेव भुसे, प्राथमिक शिक्षा अधिकारी बाबासाहेब पवार, डायट के प्राचार्य चाफले समेत सभी गुट शिक्षणाधिकारी तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में आदर्श स्कूल, पीएम श्री स्कूल, जिला नियोजन समिति के माध्यम से होने वाले स्कूल मरम्मत तथा निर्माण कार्य, फंड का उपयोग, विद्यार्थियों की संख्या, शैक्षणिक गुणवत्ता, अधिकारियों के स्कूल दौरे, शिक्षक प्रशिक्षण तथा विज्ञान संबंधी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिले में पहले चरण में 16 स्कूलों का आदर्श स्कूल के रूप में चयन किया गया था।
लंबित कार्य तत्काल पूरे किए जाएं इन स्कूलों के लिए उपलब्ध फंड, स्कूलवार मंजूर कार्य, वास्तविक खर्च, पूर्ण एवं अधूरे कार्य तथा बिना खर्च हुई राशि की जानकारी डॉ. भोयर ने ली। कुछ कार्य लंबित रहने तथा कुछ फंड वापस जाने की जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गड़चिरोली जैसे जिले के विकास के लिए सरकार द्वारा फंड उपलब्ध कराया जा रहा है, ऐसे में राशि बिना खर्च हुए वापस नहीं जानी चाहिए। संबंधित अधिकारियों को अपने अधीन आनेवाले स्कूलों, मंजूर फंड, खर्च, लंबित कार्यों और समस्याओं की अद्यतन जानकारी होनी चाहिए। आदर्श स्कूलों के कार्यों की स्कूलवार समीक्षा कर लंबित कार्य तत्काल पूरे किए जाएं। इस दौरान जानकारी दी गई कि आदर्श स्कूलों के दूसरे चरण में छह और स्कूलों का चयन किया गया है।
जिले में विद्यार्थियों की संख्या की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 10 तक छात्र संख्या वाले 325 तथा 11 से 20 छात्र संख्या वाले 317, इस प्रकार कुल 642 स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 20 या उससे कम है। डॉ. भोयर ने कहा कि कम छात्र संख्या के लिए हर जगह केवल कम आबादी ही कारण नहीं हो सकती। निजी स्कूलों की ओर अभिभावकों का बढ़ता रुझान, शैक्षणिक गुणवत्ता और स्थानीय परिस्थितियां भी इसके कारण हो सकते हैं। इसलिए डायट को इन स्कूलों का स्कूलवार विश्लेषण कर छात्र संख्या कम होने के वास्तविक कारणों का पता लगाना चाहिए। साथ ही छात्र संख्या और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश उन्होंने दिए।
जिले में कुल 24 पीएम श्री स्कूल हैं। इनमें 11 प्राथमिक, 9 उच्च प्राथमिक तथा 4 माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में इन स्कूलों के लिए 3 करोड़ 48 लाख 48 हजार 997 रुपये प्राप्त हुए, जिसमें से 1 करोड़ 62 लाख 20 हजार 558 रुपये खर्च होने की जानकारी बैठक में दी गई। राज्यमंत्री डॉ. भोयर ने निर्देश दिए कि पीएम श्री स्कूलों में उपलब्ध फंड से कौन-कौन सी सुविधाएं विकसित की गई, उनका विद्यार्थियों को कितना लाभ मिल रहा है, शैक्षणिक गुणवत्ता में क्या बदलाव आया और छात्र संख्या पर इसका क्या प्रभाव पड़ा, इसका नियमित मूल्यांकन किया जाए। वरिष्ठ अधिकारियों को प्रत्यक्ष रूप से स्कूलों का दौरा कर इन सुविधाओं और उनके उपयोग की जांच करनी चाहिए। इस दौरान पीएम श्री जवाहरलाल नेहरू उच्च प्राथमिक स्कूल, नगर परिषद गडचिरोली के मुख्याध्यापक सुधीर गोहणे ने स्कूल की विभिन्न गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि पीएम श्री योजना के तहत स्कूल में गणित एवं विज्ञान किट, 'बाला', ग्रीन स्कूल, पुस्तकालय, खेल सामग्री और रोबोटिक्स लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस स्कूल में बालवाटिका से कक्षा नौवीं तक 1,227 विद्यार्थी अध्ययनरत है।
जिला नियोजन समिति के माध्यम से स्कूलों की मरम्मत और भवन निर्माण के लिए भी बड़ी मात्रा में फंड उपलब्ध कराया जा रहा है। केवल भवन और भौतिक सुविधाएं तैयार करना अंतिम उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनका उचित रखरखाव, प्रभावी उपयोग और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना अधिक महत्वपूर्ण है, डॉ. भोयर ने कहा कि, सरकार की योजनाओं और नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए और उसका परिणाम सीधे स्कूलों तथा विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए। विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान की रुचि विकसित करने के लिए विज्ञान प्रदर्शनियों एवं प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को देश की प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थाओं का दौरा कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए, डा। भोयर ने कहा। 'मुख्यमंत्री विद्यार्थी विज्ञान वारी योजना' तथा तहसील व जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन कर गड़चिरोली जिले के कम से कम 100 विद्यार्थियों को इसरो के अध्ययन दौरे पर भेजने की योजना तैयार करने के निर्देश उन्होंने दिए।