गड़चिरोली धान खरीदी  (सोर्सः सोशल मीडिया)
गड़चिरोली

Gadchiroli News: धान खरीदी की शर्तों पर गड़चिरोली में रोष...तो खरीद बंद करने की सरकार को चेतावनी

Gadchiroli Farmers: गड़चिरोली में धान खरीदी संस्थाओं ने सरकार की कठोर शर्तों का विरोध किया है। शर्तों में ढील नहीं मिलने पर संस्थाओं ने किसानों से धान खरीदी बंद करने की चेतावनी दी।

आंचल लोखंडे

Gadchiroli Paddy Procurement: सरकार द्वारा लगाए गए कठोर शर्तों के कारण आदिवासी खरीदी-बिक्री महामंडल तथा सरकारी समर्थन मूल्य धान खरीदी-बिक्री संस्थाएं मुश्किलों में आ गई हैं। यदि सरकार ने इन शर्तों में ढील नहीं दी तो किसानों से धान खरीद नहीं करने की चेतावनी विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने दी है। देसाईगंज स्थित कृषि उपज बाजार समिति के सभागृह में गड़चिरोली जिले की विभिन्न आदिवासी धान खरीद संस्था तथा सरकारी समर्थन मूल्य धान खरीदी-बिक्री संस्थाओं के संचालक मंडल की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मार्केटिंग फेडरेशन, मुंबई के संचालक तथा खरीदी-बिक्री संघ, चामोर्शी के अध्यक्ष अतुल गण्यारपवार, चांगदेव फाये, गोपाल उईके, व्यंकटी नागिलवार, अण्णाजी तुपट, यशवंत चौरिकर, विनोद खुणे, संगीता उपटलावार, दयाराम उसेंडी, ईश्वर मडावी, प्रभाकर जुमनाके, जगन्नाथ जांभुलकर समेत विभिन्न संस्थाओं के अध्यक्ष तथा संचालक मंडल के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे। बैठक के बाद जानकारी देते हुए अतुल गण्यारपवार ने कहा कि किसानों को अपना धान व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने से बचाने के लिए समर्थन मूल्य धान खरीद योजना शुरू की गई थी।

खरीदी संस्था का अस्तित्व ही खतरे में

इसके तहत किसानों से धान खरीदने का अधिकार आदिवासी सहकारी संस्थाओं तथा सरकारी धान खरीदी-बिक्री संस्थाओं को दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदे गए धान का उठाव 2 महीने के भीतर किए जाने का प्रावधान होने के बावजूद पणन व्यवस्था द्वारा कई बार एक से डेढ़ वर्ष तक धान नहीं उठाया जाता है। गोदाम का किराया तथा हमाली की राशि भी समय पर नहीं दी जाती है। लंबे समय तक धान नहीं उठाएं जाने से होनेवाली कमी की भरपाई भी संस्थाओं से डेढ़ गुना दर पर वसूल की जाती है। उन्होंने कहा कि नए नियम के अनुसार संचालक मंडल को अपनी जमीन-जायदाद की गारंटी का पत्र सरकार को देना अनिवार्य किया गया है। इन सभी कठोर शर्तों के कारण खरीदी संस्था का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है।

अनेक मांगों की ओर किया ध्यानार्षण

संस्थाओं ने मांग की है कि सरकार द्वारा खरीदे गए धान का निर्धारित समय, यानी 2 माह के भीतर उठाया जाए, धान की माप-तौल करनेवाले हमालों की मजदूरी समय पर दी जाए, जमीन-जायदाद की गारंटी पत्र की शर्त रद्द की जाए तथा वजन में होने वाली कमी के लिए डेढ़ गुना दर से वसूली तत्काल बंद की जाए। इन मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो धान खरीदी बंद करने की चेतावनी संस्थाओं ने दी है। साथ ही आने वाले दो दिनों में पणन मंत्री तथा मुख्यमंत्री से मुलाकात कर समस्या का समाधान निकालने का अनुरोध किया जाएगा, ऐसी जानकारी पत्रपरिषद के माध्यम से दी गई।

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