Gadchiroli Teachers Absent: दुर्गम और अतिदुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा का मुद्दा गंभीर बना हुआ है। इसी बीच एटापल्ली तहसील में शिक्षा विभाग के निरीक्षण के दौरान 9 शिक्षक बिना पूर्व अनुमति के अनधिकृत रूप से गैरहाजिर यानी अपसेंट पाए गए। गटशिक्षणाधिकारी ऋषिकेश बुरडकर द्वारा किए गए निरीक्षण में कसनसूर और कोटमी केंद्रों के अंतर्गत यह मामला सामने आया। शिक्षा विभाग ने संबंधित सभी शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एटापल्ली तहसील में गट्टा, कसनसूर, घोटसूर, जारावंडी, दोलंदा, कोटमी और सुरजागड सहित कुल आठ शैक्षणिक केंद्र हैं।
तहसील में जिला परिषद के अनेक स्कूलें हैं, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूल दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। ऐसे क्षेत्रों में अधिकारियों की नियमित निगरानी सीमित रहने का लाभ उठाकर कुछ शिक्षक कर्तव्य के प्रति लापरवाही कर रहे हैं क्या, यह सवाल इस घटना के बाद उठने लगा है। एटापल्ली तहसील की अनेक स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में कार्यरत शिक्षक भी नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। दुर्गम एवं अतिदुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है।
स्कूलों में बायोमेट्रिक अथवा ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने की बात कही जाती है। इसके बावजूद वास्तविक उपस्थिति और ऑनलाइन दज्ज उपस्थिति में कोई अंतर तो नहीं है तथा शिक्षकों का वेतन वास्तविक उपस्थिति के आधार पर ही निकाला जाता है या नहीं इसकी भी जांच किए जाने की आवश्यकता है। गुटशिक्षणाधिकारी के प्रत्यक्ष निरीक्षण के दौरान एक साथ शिक्षक गैरहाजिर पाए जाने से शिक्षा विभाग की नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि निरीक्षण के दौरान ही इतनी बड़ी संख्या में शिक्षक अनुपस्थित मिले हैं, तो दुर्गम और अतिदुर्गम क्षेत्रों की अन्य स्कूलों की वास्तविक स्थिति क्या होगी, इसकी भी जांच आवश्यक है।
निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर पाए गए शिक्षकों में प्रकाश मडावी (कसनसूर), साईनाथ तिमाडे (गडेरी), प्रकाश मोहुर्ले (आसांवडी), वसंत गव्हारे (झुरी), पितांबर चापले (नैनगुडा), कृष्णानाथ बडा (हालेवारा), दीपक मंडल (वेनासर), महादेव दुर्गे (कोटमी) और रेखचंद वालके (कोईदुल) का समावेश है। शिक्षा विभाग की ओर से 20 अगस्त को संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कहा गया है कि, 18 और 19 अगस्त को विद्यालयीन समय में निरीक्षण के दौरान संबंधित शिक्षक बिना किसी पूर्व अनुमति के अनुपस्थित पाए गए।
निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर पाए गए शिक्षकों में प्रकाश मडावी (कसनसूर), साईनाथ तिमाडे (गडेरी), प्रकाश मोहुर्ले (आसांवडी), वसंत गव्हारे (झुरी), पितांबर चापले (नैनगुडा), कृष्णानाथ बडा (हालेवारा), दीपक मंडल (वेनासर), महादेव दुर्गे (कोटमी) और रेखचंद वालके (कोईदुल) का समावेश है। शिक्षा विभाग की ओर से 20 अगस्त को संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कहा गया है कि, 18 और 19 अगस्त को विद्यालयीन समय में निरीक्षण के दौरान संबंधित शिक्षक बिना किसी पूर्व अनुमति के अनुपस्थित पाए गए।
जिप गड़चिरोली के शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) प्रेरक उजगारे ने कहा कि शिक्षकों के अनधिकृत रूप से गैरहाजिर पाए जाने का मामला गंभीर है। इस संबंध में पूरी जानकारी लेकर संबंधित शिक्षकों के स्पष्टीकरण की जांच की जाएगी। यदि इसमें दोष पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे। दुर्गम एवं अतिदुर्गम क्षेत्रों की स्कूलों में विद्यार्थियों को नियमित और गुणवतापूर्ण शिक्षा मिल रही है या नहीं, साथ ही शिक्षकों की उपस्थिति एवं शैक्षणिक कार्य की वास्तविक स्थिति जानने के लिए मैं स्वयं भी दुर्गम क्षेत्रों की स्कूलों का दौरा कर निरीक्षण करूंगा।