Highlights:
गड़चिरोली के चामोर्शी में भेंडाला क्षेत्र के 14 गांवों की कृषि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हजारों किसानों और महिलाओं ने चक्काजाम आंदोलन किया।
आष्टी क्रॉसिंग पर आधे घंटे और लक्ष्मी गेट चौक पर डेढ़ घंटे तक रास्ता रोको आंदोलन किया गया।
किसानों ने मुख्यमंत्री और सह-पालकमंत्री की उपस्थिति में किसान प्रतिनिधियों के साथ सामूहिक बैठक कराने की मांग की।
Gadchiroli Farmers Protest: गड़चिरोली जिले के चामोर्शी तहसील के भेंडाला क्षेत्र के 14 गांवों की कृषि भूमि के अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों का आक्रोश सामने आया है। गुरुवार को चामोर्शी में हजारों किसानों और महिलाओं ने एकजुट होकर चक्काजाम आंदोलन किया। किसान बचाव जनआंदोलन समिति और महिला समिति के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन के कारण क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और यातायात प्रभावित हुआ।
आष्टी क्रॉसिंग पर करीब आधे घंटे तक रास्ता रोको आंदोलन किया गया, जबकि शहर के मुख्य लक्ष्मी गेट चौक पर एक से डेढ़ घंटे तक प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोके रखा। किसानों और महिलाओं ने लक्ष्मी गेट के पास धरना देकर आंदोलन को और तेज कर दिया। बड़ी संख्या में किसानों और महिलाओं की भागीदारी के कारण आंदोलन व्यापक रूप लेता दिखाई दिया।
आंदोलन के दौरान किसान बचाव जनआंदोलन समिति की ओर से चामोर्शी के उपविभागीय अधिकारी (SDO) को संबोधित ज्ञापन तैयार किया गया। हालांकि, समिति के अनुसार, शाम 6 बजे तक ज्ञापन स्वीकार करने के लिए सरकार या प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी अथवा प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। इसके चलते किसान शाम तक आंदोलन स्थल पर डटे रहे। ज्ञापन में मुख्यमंत्री और सह-पालकमंत्री की उपस्थिति में किसान प्रतिनिधियों के साथ सामूहिक बैठक आयोजित करने की प्रमुख मांग की गई है।
समिति ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि इससे पहले गड़चिरोली में हुए धरना आंदोलन के दौरान सह-पालकमंत्री आशीष जयस्वाल ने किसानों को लिखित आश्वासन दिया था। समिति के मुताबिक, किसानों को आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समय बढ़ाने और मुख्यमंत्री के साथ बैठक होने तक भूमि अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, किसान प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि, इन आश्वासनों पर प्रभावी तरीके से अमल नहीं किया जा रहा है। इसी कारण किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
भेंडाला क्षेत्र के 14 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा रहा है। किसानों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय लेने और उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने की मांग की गई है। किसान बचाव जनआंदोलन समिति और महिला समिति ने कहा कि, किसानों की मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। समाचार लिखे जाने तक आंदोलन जारी रहा। किसानों ने वहीं चुल्हे जलाकर रातभर आंदोलन करने का निर्णय लिया। लेकिन किसी भी अधिकारी ने भेंट नहीं दी।
किसान बचाव जनआंदोलन समिति ने मांग की है कि, प्रभावित किसानों के मुद्दों पर सामूहिक बैठक होने तक जनसुनवाई स्थगित रखी जाए। समिति का कहना है कि, किसानों को विश्वास में लिए बिना और उनकी आपत्तियों व मांगों पर ठोस निर्णय किए बिना भूमि अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए, ज्ञापन के अनुसार, फराडा, बेल्लूर और रीठ गांवों के किसानों के लिए 16 अक्टूबर को जनसुनवाई की सूचना जारी की गई है। इससे प्रभावित किसानों में असमंजस और चिंता बढ़ गई है।