न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश! SCBA ने निखिल वागले और संजय राउत के खिलाफ दायर की अवमानना याचिका

Criminal Contempt Petition: न्यायपालिका को बदनाम करने के मामले में SCBA सख्त। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI के खिलाफ टिप्पणियों पर संजय राउत और निखिल वागले के खिलाफ दायर की आपराधिक अवमानना याचिका।
scba files criminal contempt against sanjay raut and nikhil wagle
संजय राउत और निखिल वागले(सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Highlights

  • SCBA ने CJI के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों पर आपराधिक अवमानना याचिका दायर की है।

  • अटॉर्नी जनरल ने पत्रकार निखिल वागले और सांसद संजय राउत पर कार्रवाई की मंजूरी दी।

  • याचिका में न्यायपालिका को बदनाम करने और संस्था की गरिमा गिराने का गंभीर आरोप है।

SCBA Files Criminal Contempt Against Sanjay Raut And Nikhil Wagle: न्यायपालिका की गरिमा और सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार को बनाए रखने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एक बड़ा कानूनी कदम उठाया है। SCBA ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत के खिलाफ सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणियां करने के आरोप में वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका दायर की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में CJI सूर्याकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ द्वारा की जाएगी।

टॉर्नी जनरल ने दी आपराधिक अवमानना कार्रवाई की मंजूरी

कंटेंप्ट ऑफ काेर्ट एक्ट, 1971 की धारा 15 के तहत यह आपराधिक अवमानना याचिका दायर की गई है। SCBA के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय के लिखित अनुरोध पर भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने इस कानूनी कार्रवाई को शुरू करने की औपचारिक लिखित सहमति प्रदान की है।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अपनी सहमति देते हुए टिप्पणी की कि दोनों आरोपियों द्वारा की गई टिप्पणियां अपमानजनक हैं। उन्होंने कहा कि इन बयानों का मुख्य उद्देश्य भारत के सर्वोच्च न्यायालय और विशेष रूप से देश के मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा तथा गरिमा को जनता की नजरों में गिराना है। वहीं SCBA ने अपनी याचिका में कहा है कि वागले और राउत के बयान जानबूझकर और सोच-समझकर न्यायपालिका के अधिकार को नीचा दिखाने तथा संस्था को बदनाम करने के इरादे से दिए गए हैं।

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पत्रकार निखिल वागले पर लगे आरोप

याचिका के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब CJI सूर्याकांत ने दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के अनुरोध को खारिज कर दिया था। इसके तुरंत बाद, वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अकाउंट से CJI के खिलाफ बेहद अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए एक पोस्ट शेयर की थी।

SCBA ने अपनी याचिका में जोर देकर कहा कि एक वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार द्वारा मास ऑडियंस के सामने सोशल मीडिया पर इस तरह का आपत्तिजनक बयान देना सुप्रीम कोर्ट की अथॉरिटी को नीचा दिखाता है और जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाता है।

इसी बीच एक नया मोड़ तब आया जब पत्रकार निखिल वागले ने इस विवादित टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांग ली। वागले ने स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी एक भावनात्मक आवेग का परिणाम थी और उन्होंने तुरंत उस विवादित पोस्ट को हटा भी दिया है।

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सांसद संजय राउत पर न्यायपालिका को बदनाम करने का आरोप

दूसरी तरफ, शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत पर भी न्यायपालिका और न्यायाधीशों के खिलाफ गंभीर तथा भ्रामक आरोप लगाने का दावा किया गया है। याचिका में समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि संजय राउत ने सार्वजनिक रूप से झूठे दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायाधीश सत्ताधारी दल के राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं और मुख्यमंत्रियों द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल होते हैं।

इतना ही नहीं, संजय राउत ने लंदन में राजनीतिक हस्तियों के साथ न्यायाधीशों के बैडमिंटन खेलने की कथित तस्वीरों का हवाला देते हुए CJI और अन्य जजों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और गंभीर आक्षेप लगाए थे। SCBA का कहना है कि इस तरह की अनर्गल बयानबाजी संस्थागत विश्वास को कमजोर करती है।

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