

गोगांव और अडपल्ली के किसानों ने मुआवजे में असमानता का आरोप लगाया।
कुछ जमीनों का मूल्यांकन 30–35 लाख रुपये प्रति एकड़ तक होने का दावा।
गोगांव में 6–7 लाख और अडपल्ली में 14–15 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का प्रस्ताव होने की बात।
सभी प्रभावित किसानों को कम से कम 25 लाख रुपये प्रति एकड़ देने की मांग।
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मूल्यांकन की विसंगतियां दूर करने की अपील।
Gadchiroli Land Acquisition Farmer Compensation Dispute: गड़चिरोली, कोटगल बैरेज प्रकल्प के तहत गोगांव और अडपल्ली गांवों की कृषि भूमि के अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित मुआवजे में भारी असमानता होने का आरोप प्रभावित किसानों ने लगाया है। किसानों का कहना है कि कुछ जमीनों का मूल्यांकन 30 से 35 लाख रुपये प्रति एकड़ तक किया गया है, जबकि गोगांव के अधिकांश किसानों को केवल 6 से 7 लाख रुपये और अडपल्ली के किसानों को 14 से 15 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा प्रस्तावित किया गया है।
इस कथित भेदभाव के विरोध में किसानों ने सभी प्रभावितों को कम से कम 25 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। रविवार, 11 अक्टूबर को गोगांव स्थित आई फार्म में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं। इसके बाद जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर भूमि मूल्यांकन में दिखाई दे रही विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई।
प्रभावित किसानों ने सवाल उठाया कि लगभग समान भौगोलिक परिस्थितियों वाली जमीनों के लिए मुआवजे की राशि में इतना बड़ा अंतर क्यों है। उन्होंने मूल्यांकन के आधार, अपनाए गए मानदंडों और संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
किसानों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण विभाग की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी नोटिसों के संदर्भ में उन्होंने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि जमीन की उपजाऊ क्षमता, भौगोलिक स्थिति और वर्तमान बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित मुआवजे का निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
गड़चिरोली किसानों ने दावा किया कि अडपल्ली के एक-दो और गोगांव के कुछ किसानों की जमीन का मूल्यांकन 30 से 35 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मंजूर किया गया है। इसके अलावा, अडपल्ली के एक किसान की 20 आर जमीन के लिए 65 लाख रुपये का मूल्यांकन मंजूर होने की जानकारी भी सामने आई है।
किसानों ने इन मामलों की आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण के कारण उनकी आजीविका का प्रमुख साधन प्रभावित हो रहा है, इसलिए सभी प्रभावितों को उचित और न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।
गड़चिरोली किसानों ने चेतावनी दी है कि मूल्यांकन में कथित विसंगतियों को दूर कर सभी प्रभावितों को न्यायसंगत मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करेंगे।
संवाददाता सम्मेलन में राजू इंटनकर, शंकर सालोटकर, जितेंद्र मुप्पीडवार, विनोद म्हशाखेत्री, नरेंद्र म्हस्के, राजेश वाणी, ईशान्य भोयर, प्रमोद भाकरे और प्रभाकर चौधरी सहित गोगांव तथा अडपल्ली के अनेक प्रभावित किसान उपस्थित थे।