Sambhajinagar Stray Dog Control: छत्रपति संभाजीनगर शहर की आबादी 25 लाख के करीब पहुंच रही है, लेकिन सड़कों पर आतंक मचा रहे आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए महानगरपालिका के पास महज नौ कर्मचारी हैं। कुत्ते पकड़ने के लिए पांच वाहन उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इनमें से एक लंबे समय से बंद है। ऐसे में चार वाहनों और नौ कर्मचारियों के भरोसे पूरे शहर के आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी है।
कुत्तों के हमलों में महिलाएं और छोटे बच्चे घायल हो रहे हैं, इसके बावजूद मनपा प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली पर मंगलवार को स्थायी समिति की बैठक में सदस्यों ने जमकर नाराजगी जताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभापति अनिल मकरिये ने पशुसंवर्धन विभाग में तत्काल अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
सभापति अनिल मकरिये की अध्यक्षता में हुई स्थायी समिति की बैठक में मोकाट कुत्तों का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से उठा। शिवसेना की नगरसेविका श्वेता त्रिवेदी ने सातारा-देवलाई और पैठण रोड क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही वाहनों की संख्या का मुद्दा उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मनपा की ओर से कुत्तों को पकड़कर ले जाया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें फिर उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है। त्रिवेदी ने सातारा क्षेत्र में कुत्ते के हमले में घायल बच्चे की तस्वीर भी बैठक में दिखाई। तस्वीर देखकर सदस्यों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
भाजपा के नगरसेवक रवि कावडे, एड. माधुरी अदवंत तथा उबाठा के सचिन खैरे ने भी प्रशासन से सवाल किए। खैरे ने कहा कि पुराने शहर में मोकाट श्वानों की समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। श्वान अक्सर वाहनों के नीचे बैठे रहते हैं और अचानक बाहर निकलकर राहगीरों पर हमला कर देते हैं।
महिलाओं और स्कूली बच्चों के लिए स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। एमआईएम के शेख मतीन ने बैठक में आवारा सूअरों की समस्या भी उठाई। इस पर सभापति ने प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
प्रभारी पशुसंवर्धन अधिकारी अनंत जाधव ने बताया कि श्वान पकड़ने के लिए छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के पास पांच वाहन हैं। इनमें से एक वाहन बंद है। श्वान पकड़ने के काम में फिलहाल नौ कर्मचारी कार्यरत हैं और 10 अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग प्रशासन से की गई है।
इस पर भाजपा के सुरेंद्र कुलकर्णी ने सवाल उठाया कि जब शहर की आबादी 25 लाख के करीब पहुंच रही है, तब केवल नौ कर्मचारियों के भरोसे श्वान पकड़ने का अभियान कैसे सफल होगा। श्वेता त्रिवेदी ने प्रत्येक प्रभाग के लिए कम से कम एक श्वान पकड़ने वाला वाहन उपलब्ध कराने की मांग की। सभापति अनिल मकरिये ने प्रशासन को तत्काल मनुष्य बल बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि मोकाट श्वानों के कारण नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
महानगरपालिका ने कुछ वर्ष पहले मोकाट श्वानों को पकड़कर उनके नसबंदी अभियान की जिम्मेदारी ‘होप’ संस्था को दी थी। संस्था की ओर से चार हजार से अधिक श्वानों की नसबंदी किए जाने का दावा किया गया। इसके साथ ही सामाजिक दायित्व निधि से रेलवे स्टेशन उड़ान पुल के नीचे करीब 90 लाख रुपये खर्च कर 150 श्वानों की क्षमता वाला आधुनिक डॉग हाउस भी बनाया गया था।
हालांकि, निर्माण के करीब एक वर्ष के भीतर ही यहां काम बंद हो गया। शहर की कुछ पशु प्रेमी संस्थाओं ने ‘होप’ संस्था के कामकाज को लेकर पशु कल्याण बोर्ड में शिकायत की थी। इसके बाद तत्कालीन सांसद मेनका गांधी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच भी हुई, लेकिन इसी बीच फरवरी 2026 में ‘होप’ संस्था ने मनपा को काम बंद करने का पत्र दे दिया।
संस्था के हटने के बाद मार्च 2026 से महानगरपालिका की ओर से कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू किया गया, लेकिन रोजाना केवल तीन से चार कुत्तों MA की नसबंदी हो पा रही है। शहर में मोकाट श्वानों की बढ़ती संख्या और नसबंदी की बेहद धीमी गति के बीच समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
अब सवाल यह है कि 25 लाख की आबादी वाले शहर में आवारा श्वानों के बढ़ते आतंक पर नियंत्रण के लिए महानगरपालिका कब पर्याप्त कर्मचारियों, वाहनों और प्रभावी नसबंदी व्यवस्था की सुविधा उपलब्ध कराएगी।