

वर्धा. जिले के कुछ गांवों में मवेशियों पर विशेषत: भैसों पर अज्ञात बीमारी की लागन बड़े पैमाने पर देखने मिल रही है़ कुछ गांवों में भैंसों की मौत भी हो चुकी है़ इसे देखते हुए जिप का पशुसंवर्धन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है़ संबंधित गांवों में पहुंच कर पशु चिकित्सक बीमार पशुओं पर औषधोपचार कर रहे है़.
बता दें कि, हिंगनघाट तहसील के उमरी (येडे), आष्टी तहसील के आष्टी, पेठ अहमदपुर, भारसवाड़ा, देलवाड़ी, खड़की एवं आर्वी तहसील के रसुलाबाद सहित जिले के अन्य कुछ गांवों में विशेषत: भैंस वर्गीय पशुओं पर अज्ञात बीमारी के लक्षण देखने को मिल रहे है़.
बीमारी से ग्रस्त पशुओं के नमूने जिला तथा नागपुर स्थित विभागीय प्रयोगशाला टीम ने संबंधित गांवों में पहुंचकर इकठ्ठा किए है़ं प्राथमिक स्तर पर बैबेसिया, ॲनाप्लाझमा, ट्रिपॅनोसोमियासिस इस मिश्र स्वरुप की बीमारी ने पशुओं की मौत होने का अनुमान जताया गया है़ उक्त बीमारी पशुओं से मनुष्य तक न पहुंचे, इसलिए सतर्क रहना जरूरी बताया गया है. बैबेसिया, एनाप्लाझमा, ट्रिपैनोसोमियासिस बीमारी गोचिड (किट) तथा गोमख्मीजन्य हिमोप्रोटोझोन प्रकार की है़ इसके नियंत्रण के लिए गोचिड, गोमख्मी निर्मूलन प्रभावी रूप से चलाना जरूरी है.
शासकीय पशुचिकित्सालयों में गोचिड निर्मूलन दवाई उपलब्ध बताई गई है़ इसके मिश्रण की किसानों ने तबेले में छिड़काव करें. बैबेसिया, ॲनाप्लाझमा, ट्रिपॅनोसोमियासिस यह बिमारी गाय, बैल, बछडे, भैंस आदि पशुओं में खून प्रोटोझोआ से होनेवाली घातक बीमारी है़ प्रोटोझोआ पशुओं के शरीर में किट के जरिए प्रवेश करती है़ खून में मिलकर लाल पेशी नष्ट करती है़ इससे पेशी में हिमोग्लोबीन पेशाब के जरिए बाहर निकाल कर इस रंग कॉफी जैसा गाड़ा सूखा रहता है.
परिणामवश रक्त की कमी से पिलिया जैसे लक्षण भी पाये जाते है़ं यह लक्षण दिखाई देते ही शीघ्र औषधोपचार न करने पर पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है़ इसमें पीडित पशु को 105 डीग्री सेल्सियस तक बुखार आता है़ उसका खानपान कम हो जाता है़ आलस, गश खाना, कमजोरी आती है़ इस बीमारी से पशु की मृत्यु होने पर इसका बंदोबस्त मकान से दूर गहरे गड्ढे में करें अथवा जलाकर शास्त्रीय पध्दति से नष्ट करना जरूरी है़
जिले के किसान व गोपालकों ने सतर्क रह कर पशुओं का ध्यान रखना जरूरी है़ पशुओं को 105 डिग्री सेल्सिअस तक बुखार व अन्य लक्षण दिखाई देते ही समीप के पशुचिकित्सालय से संपर्क करें. पशुओं पर उचित औषधोपचार करें. पशु तथा तबेले में गोचिड (किट), गोमख्खी निर्मूलन औषधि का छिड़काव करें.
-डा़ सचिन ओम्बासे, CEO, जिप वर्धा