Aurangabad High Court: अदालत और न्यायिक प्रणाली के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक एवं अपमानजनक टिप्पणियां करने के मामले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राजाराम राउत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने इस संबंध में संजय राउत और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ फौजदारी (अपराधिक) अवमानना का नोटिस जारी करने का सख्त आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस. सी. मोरे और न्यायमूर्ति वैशाली जाधव-पाटील की खंडपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद जारी किया।
यह कानूनी कार्रवाई अधिवक्ता अमित देशपांडे द्वारा उनके कानूनी प्रतिनिधि अधिवक्ता शैलेंद्र गंगाखेडकर के माध्यम से दायर एक आपराधिक अवमानना याचिका पर शुरू हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विभिन्न जनसभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भारत के सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और संपूर्ण न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले अवमाननापूर्ण बयान दिए थे।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस प्रकार की बयानबाजी से आम जनता का न्याय प्रणाली पर से भरोसा उठता है और यह न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
इस मामले में अधिवक्ता अमित देशपांडे ने अधिवक्ता शैलेंद्र गंगाखेडकर के माध्यम से फौजदारी अवमान याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राउत ने विभिन्न माध्यमों से सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और न्यायपालिका के संबंध में कथित रूप से अवमाननापूर्ण टिप्पणियां की थीं।
याचिकाकर्ता ने पहले राज्य के महाधिवक्ता से अवमान कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी थी। याचिका के अनुसार, महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे से अनुमति मिलने के बाद उच्च न्यायालय में फौजदारी अवमान याचिका दाखिल की गई।
याचिका में कहा गया है कि राउत के कथित बयान विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रसारित और प्रकाशित हुए थे। न्यायालय ने इन माध्यमों के संपादकों को भी नोटिस जारी किया है।