संभाजीनगर के परिवार और कुत्ते की सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
छत्रपति संभाजीनगर

न खा रहा, न पी रहा.. बस इंतजार में बैठा है कुणाल का शेरू, संभाजीनगर में परिवार की मौत, रास्ता तक रहा अकेला डॉग

Chhatrapati Sambhajinagar Incident: संभाजीनगर में हादसे के बाद परिवार के तीनों सदस्यों की मौत से वफादार कुत्ता शेरू सदमे में है। सूने घर में बैठा शेरू घंटों से न कुछ खा रहा है और न ही पानी पी रहा है।

गोरक्ष पोफली

Sambhajinagar Family Death Faithful Pet Dog Sheru Waiting: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कोहड्या पहाड़ी पर घटित हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक मामूली मोबाइल की EMI के विवाद में देखते ही देखते एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। 19 वर्षीय बेटे कुणाल को बचाने की कोशिश में पिता मुरलीधर (48) और फिर अपनी आंखों के सामने दोनों को गहरी खाई में गिरता देख सदमे में मां संगीता (42) ने भी मौत की छलांग लगा दी।

इस भयानक त्रासदी के बाद घर में केवल सन्नाटा पसरा है, जिसे चीर रही है एक बेजुबान की रोने की आवाज। वह बेजुबान कोई और नहीं, बल्कि कुणाल का बेहद वफादार पालतू कुत्ता शेरू है, जो पिछले कई घंटों से अपने प्यारे मालिकों के वापस लौटने की राह देख रहा है।

मालिकों की राह तकता वफादार शेरू

हादसे के बाद से ही शेरू बंद घर में अकेला रह गया है। कुणाल का अपने कुत्ते से बेहद गहरा लगाव था। पिछले छह सालों से कुणाल ही उसका सारा ध्यान रखता था और उसकी देखभाल करता था। वह रोजाना सुबह उसे टहलाने के लिए बाहर लेकर जाता था।

लेकिन आज शेरू छत्रपति संभाजीनगर के उसी सूने घर में अकेला बैठा है और उसे यह नहीं पता कि जिस कुणाल के साथ वह रोज बाहर जाता था, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा।

भूख-प्यास भूला वफादार शेरू

शुक्रवार की रात से ही शेरू लगातार जोर-जोर से रो रहा है और खिड़की से उसके भौंकने की आवाजें आ रही हैं। घर के खालीपन को चीरती हुई इस बेजुबान की आवाज पड़ोसियों का दिल दहला रही है। पड़ोसियों के मुताबिक, परिवार के अचानक चले जाने के सदमे को शायद यह बेजुबान भी महसूस कर रहा है।

वह पिछले कई घंटों से न तो कुछ खा रहा है, न पानी पी रहा है और न ही ठीक से सो पा रहा है। पड़ोसियों ने उसे खाना खिलाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसने कुछ भी खाने से साफ इनकार कर दिया।

पड़ोसियों और मकान मालिक की भावुक दास्तान

मकान मालिक आदित्य देशपांडे के अनुसार, चांदगुडे परिवार कुछ महीने पहले ही देवळाई इलाके से यहां झाल्टा फाटा परिसर में रहने आया था। मुरलीधर चांदगुड़े एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में ट्रक ड्राइवर थे और काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते थे।

पड़ोसियों का कहना है कि शेरू परिवार के तीनों सदस्यों से बेहद प्यार करता था। घर में अब कोई नहीं बचा है, इसलिए पड़ोसियों ने पुलिस से भी गुहार लगाई है कि इस बेजुबान को घर से बाहर निकाला जाए और उसकी देखरेख की उचित व्यवस्था की जाए।

आंसुओं के बीच दादा ने संभाली जिम्मेदारी

इस घोर निराशा और दुःख के माहौल में कुणाल के बुजुर्ग दादा बबनराव गाभुड शनिवार को शेरू से मिलने पहुंचे। जब वह शेरू को बिस्किट खिला रहे थे, तो अपने होनहार पोते की याद में उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

बबनराव ने भारी मन से बताया कि कुणाल बेहद शांत और बुद्धिमान लड़का था, जो नीट-यूजी की तैयारी कर रहा था और डॉक्टर बनना चाहता था। उन्होंने कहा कि कुणाल के मन में आत्महत्या का कोई विचार नहीं था। अब कुणाल की मीठी यादों के सहारे बबनराव ने शेरू को अपने पास रखने और उसकी देखभाल करने का फैसला किया है।

क्या था पूरा मामला?

यह रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया शुक्रवार दोपहर को हुआ। कुणाल ने हाल ही में एक नया आईफोन खरीदा था और वह अपने पिता मुरलीधर पर उसकी किस्तें चुकाने का दबाव बना रहा था। इसी बात को लेकर सुबह करीब 10 बजे घर में विवाद हुआ और कुणाल गुस्से में पास की पहाड़ी पर चढ़ गया।

उसे समझाने और बचाने के लिए चोटी पर पहुंचे पिता मुरलीधर ने जैसे ही कुणाल को पीछे खींचने की कोशिश की, दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे लगभग 250 से 300 फीट नीचे गहरी खाई में गिर गए। पति और इकलौते बेटे को आंखों के सामने गिरते देख मां संगीता ने भी सदमे में तुरंत पहाड़ी से नीचे छलांग लगा दी।

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