Chhatrapati Sambhajinagar Waste Management New Rules: छत्रपति संभाजीनगर शहर में बढ़ते कचरे की समस्या से निपटने और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महानगरपालिका ने नई कार्यप्रणाली अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। घनकचरा प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अखिल भारतीय स्थानीय स्वराज्य संस्था, मुंबई की ओर से विशेष क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे ने किया।
कार्यक्रम में छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त येडगे ने कहा कि कचरा प्रबंधन को केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए इसे टिकाऊ और वैज्ञानिक व्यवस्था के रूप में विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए नई और उपयोगी अवधारणाओं को अपनाने के साथ ही प्रशिक्षण में मिली जानकारी को प्रत्यक्ष कामकाज में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को देश के अन्य शहरों में प्रभावी ढंग से संचालित कचरा प्रबंधन प्रणालियों का अध्ययन कर उपयोगी व्यवस्थाओं को छत्रपति संभाजीनगर में लागू करने के निर्देश दिए।
नए नियमों के तहत कचरे को उसके स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना जरूरी होगा। इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और स्वच्छता संबंधी कचरा शामिल हैं। घरों और अन्य प्रतिष्ठानों से कचरा निकलने के समय ही उसका उचित वर्गीकरण होने पर संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान की पूरी व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी।
बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों और प्रतिष्ठानों के लिए भी नियमों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तय की गई है। ऐसे बड़े कचरा उत्पादकों को अपने स्तर पर उत्पन्न कचरे का प्रसंस्करण कर उसका उचित निपटान करना होगा। इससे महानगरपालिका की व्यवस्था पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम करने में मदद मिलेगी।
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के उपआयुक्त तथा घनकचरा प्रबंधन विभाग के प्रमुख नंदकिशोर भोंबे ने शहर में घनकचरा प्रबंधन व्यवस्था के अब तक के सफर की जानकारी दी। उन्होंने नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्यप्रणाली, अधिकारियों की जिम्मेदारियों और विभिन्न उपायों के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में महानगरपालिका के सभी सहायक आयुक्त, स्वच्छता निरीक्षक तथा घनकचरा प्रबंधन विभाग से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का उद्देश्य नई नियमावली को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय शहर की रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था में प्रभावी रूप से लागू करना है।