Errors on MSRTC Smart Cards: महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (MSRTC) द्वारा बस यात्रियों के लिए लागू किए गए 'नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड' (NCMC Smart Card) की गंभीर खामियों के कारण सवलतधारकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्मार्ट कार्ड में बड़े पैमाने पर हुई तकनीकी और प्रिंटिंग गलतियों की वजह से पात्र यात्रियों को मजबूरी में पूरा किराया देकर यात्रा करनी पड़ रही है। इससे आम जनता पर गैर-जरूरी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
स्मार्ट कार्ड बनाने का ठेका 'मेसर्स इबिक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड' (M/s Ebix Technologies Ltd.) कंपनी को दिया गया है, लेकिन पंजीकरण प्रक्रिया में भारी लापरवाही सामने आई है। छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कई पुरुष यात्रियों के कार्ड पर 'महिला' श्रेणी दर्ज कर दी गई है, तो वहीं कई महिला सवलतधारकों के कार्ड पर छोटे बच्चों की तस्वीरें छाप दी गई हैं। इन प्रशासनिक गड़बड़ियों के कारण चेकिंग के दौरान ये कार्ड अमान्य ठहरा दिए जाते हैं।
जब यात्री बस में सफर करते हैं और कंडक्टर मशीन से कार्ड स्कैन करते हैं, तो विवरण मेल न खाने के कारण रियायती टिकट जारी नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में कंडक्टर यात्रियों को पूरा किराया देने के लिए मजबूर करते हैं। नतीजा यह हो रहा है कि सफर के दौरान यात्रियों और बस चालकों व वाहकों (कंडक्टरों) के बीच आए दिन तीखी नोकझोंक और विवाद के दृश्य देखने को मिल रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर एसटी महामंडल के अधिकारी और कार्ड जारी करने वाली एजेंसी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ढकेल रहे हैं। स्थानीय एसटी अधिकारियों का कहना है कि डेटा और प्रिंटिंग की गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर निजी एजेंसी जिम्मेदार है। दूसरी ओर, एजेंसी संचालकों का दावा है कि उन्होंने मुख्य टेक कंपनी को शिकायतों की सूची भेज दी है, लेकिन डेटा सुधार (Correction Workflow) के लिए कोई स्पष्ट नीति न होने से काम अटका हुआ है।
प्रशासनिक स्तर पर भले ही इस कार्ड की अनिवार्यता की समय-सीमा को अस्थायी रूप से आगे बढ़ा दिया गया हो, लेकिन जिन यात्रियों को गलत कार्ड बांट दिए गए हैं, उन्हें ही इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। एसटी महामंडल या तकनीकी कंपनी की तरफ से सुधार का कोई ठोस तंत्र उपलब्ध न कराए जाने के कारण एसटी के नियमित यात्रियों को लगातार असुविधा और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।