इम्तियाज जलील  ( सोर्स: सोशल मीडिया )
छत्रपति संभाजीनगर

6 महीने, 465 मौतें! मराठवाड़ा में गहराया कृषि संकट; इम्तियाज जलील का सरकार पर तीखा हमला

Chhatrapati Sambhajinagar Farmer Suicide: मराठवाड़ा में 6 महीने में 465 किसानों ने की खुदकुशी। AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने सरकार पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे के किसान आंदोलन को समर्थन दिया।

शफीउल्ला हुसैनी, गोरक्ष पोफली

Imtiaz Jaleel Attacks Maharashtra Government: मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी से जून 2026 के बीच क्षेत्र में 465 किसानों ने आत्महत्या की।

इनमें सबसे अधिक 109 मामले छत्रपति संभाजीनगर जिले के हैं, जबकि बीड में 95 और धाराशिव में 65 किसानों ने जान दी। इन आंकड़ों को लेकर एआईएमआईएम के प्रदेशाध्यक्ष तथा पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

उद्धव के आंदोलन को जलील का समर्थन

इम्तियाज जलील ने कहा कि किसानों की गंभीर स्थिति के बावजूद सरकार की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। उन्होंने किसान आत्महत्याओं के मुद्दे पर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे की ओर से किसानों के सवालों को लेकर किए जा रहे आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

सरकारी सहायता और लंबित आवेदनों की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, छह महीनों में हुई 465 किसान आत्महत्याओं में 215 मामलों को सरकारी सहायता के लिए पात्र माना गया है, जबकि 222 मामले अभी जांच और निर्णय की प्रक्रिया में हैं। केवल 108 आत्महत्याग्रस्त किसान परिवारों को सहायता वितरित की गई है।

महाराष्ट्र राज्य सरकार की योजना के तहत पात्र आत्महत्याग्रस्त किसान परिवार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।

जून महीने का गंभीर आंकड़ा

जून में मराठवाड़ा में 91 किसानों ने आत्महत्या की। छत्रपति संभाजीनगर जिले में इसी महीने 21 मामले सामने आए, लेकिन इनमें से किसी भी मामले को अब तक सहायता के लिए पात्र नहीं माना गया है और सभी प्रस्ताव लंबित हैं।

जलील ने किसान परिवारों को तत्काल राहत, कर्ज और कृषि संकट से निपटने के लिए प्रभावी उपाय तथा लंबित मामलों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

वादों से परे धरातल पर राहत की जरूरत

मराठवाड़ा में लगातार बढ़ रही किसान आत्महत्याएं क्षेत्र में गहराते कृषि संकट की विभीषिका और प्रशासनिक उपेक्षा की ओर इशारा करती हैं। कागजी वादों और लंबी जांच प्रक्रियाओं के बीच पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता न मिलना इस त्रासदी को और अधिक बढ़ा रहा है।

जब तक किसान परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत, संपूर्ण कर्जमाफी और लंबित प्रस्तावों का शीघ्र निपटारा नहीं मिलता, तब तक इस गंभीर स्थिति में सुधार पाना कठिन है। सरकार को इन आंकड़ों को केवल संख्या न मानकर धरातल पर ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।

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