

Uddhav Thackeray Marathwada Protest: मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस के अवसर पर छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे की ओर से आयोजित आंदोलन में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर मराठवाड़ा की उपेक्षा का आरोप लगाया।
उन्होंने क्षेत्र के लंबित विकास कार्यों, किसानों की समस्याओं, सूखे जैसी स्थिति और विकास के अनुशेष को लेकर सरकार से जवाब मांगा। ठाकरे ने कहा कि मराठवाड़ा की वास्तविक स्थिति केवल सरकारी विज्ञापनों और प्रचार सामग्री से नहीं बदलेगी। जमीन पर किसानों और आम लोगों की समस्याएं बनी हुई हैं।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि मराठवाड़ा के विकास का अनुशेष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह अनुशेष करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस राशि की भरपाई कौन करेगा और क्षेत्र के लंबित काम कब पूरे होंगे।
ठाकरे ने मराठवाड़ा से निर्वाचित सत्तारूढ़ दलों के सांसदों और विधायकों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के सामने मराठवाड़ा की समस्याएं मजबूती से उठानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मराठवाड़ा के विकास को लेकर घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण प्रश्न अब भी कायम हैं। उनके अनुसार पानी, रोजगार, सिंचाई और अधूरे विकास कार्य क्षेत्र के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं।
ठाकरे ने किसानों की स्थिति को लेकर सरकार पर सबसे तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में फसल नुकसान और सूखे जैसी परिस्थितियों के बावजूद राहत प्रक्रिया में देरी की जा रही है। उन्होंने सरकार द्वारा 5 अक्टूबर से पंचनामा शुरू किए जाने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसान पंचांग देखकर नहीं, बल्कि संकट और नुकसान झेलकर आत्महत्या कर रहा है।
ठाकरे ने तत्काल सूखा घोषित करने और प्रभावित किसानों को सहायता देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहत पहुंचाने में देरी किसानों की परेशानी बढ़ा सकती है। उन्होंने सरकार से किसानों के नुकसान का तत्काल आकलन कराने की मांग की।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि 5 अक्टूबर से उनकी पार्टी के नेता पूरे महाराष्ट्र में जाकर यह देखेंगे कि फसल नुकसान के पंचनामे सही तरीके से किए जा रहे हैं या नहीं। उन्होंने किसानों को समय पर सहायता नहीं मिलने की स्थिति में सरकार को जिम्मेदार ठहराने की बात कही।
उन्होंने पशुधन को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया और किसानों को केवल घोषणाओं के बजाय प्रत्यक्ष सहायता देने की मांग की। ठाकरे ने सरकार की विभिन्न योजनाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की मांग भी उठाई।
आंदोलन के दौरान ठाकरे ने मराठा, अन्य पिछड़ा वर्ग और आदिवासी समाज सहित सभी वर्गों को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा के विकास और किसानों के प्रश्नों को किसी एक समाज या राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए। क्षेत्र के लोगों को अपने अधिकारों के लिए एक साथ आवाज उठानी चाहिए।
शिवसेना ठाकरे गुट की ओर से आयोजित इस आंदोलन का मुख्य नारा ‘मराठवाड़ा का विकास, तुमसे नहीं हो पाएगा’ रखा गया था। विभागीय आयुक्त कार्यालय के सामने हुए आंदोलन में ठाकरे ने सरकार से मराठवाड़ा के लंबित प्रश्नों पर स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग की।
ठाकरे के भाषण में मराठवाड़ा का विकास, किसानों की आर्थिक स्थिति, फसल नुकसान का आकलन, सूखे की स्थिति और लंबित विकास कार्य प्रमुख मुद्दे रहे।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि समयबद्ध निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन से होगा। आंदोलन के माध्यम से उन्होंने सरकार पर मराठवाड़ा के प्रति जवाबदेही तय करने का दबाव बनाने की कोशिश की।