महाराष्ट्र में धर्मांतरण करवाकर मुस्लिम आबादी बढ़ाने का AIMIM का प्लान! इम्तियाज जलील पर बरसे संजय निरूपम

Sanjay Nirupam Allegations: शिवसेना नेता संजय निरूपम का AIMIM पर बड़ा हमला। AIMIM नेताओं के पुराने बयानों का हवाला देकर लगाया महाराष्ट्र में धर्मांतरण के जरिए मुस्लिम आबादी बढ़ाने की साजिश का आरोप।
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AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और इम्तियाज जलील (सोर्स: सोशल मीडिया)
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AIMIM Conversion Agenda In Maharashtra: शिवसेना शिंदे गुट के फायरब्रैंड नेता संजय निरूपम हमेशा अपने बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। राजनीति में उनकी बेबाकी अक्सर नए विवादों को जन्म देती है। अब उन्होंने AIMIM के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील और मुंब्रा की कॉरपोरेटर सहर शेख के पुराने बयानों को लेकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।

मुंब्रा को हरा करने के बयान पर छिड़ा विवाद

संजय निरूपम ने एक पुराने विवाद का जिक्र करते हुए AIMIM को घेरा। उन्होंने बताया कि मुंब्रा में एआईएमआईएम की एक महिला कॉरपोरेटर सहर शेख ने चुनाव जीतने के बाद एक विवादित बयान दिया था। निरूपम के अनुसार, उस कॉरपोरेटर ने सरेआम कहा था कि वह पूरे मुंब्रा को हरा कर देंगी। इस बयान पर उस समय भी काफी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी और इसे एक विशेष सांप्रदायिक एजेंडे के तौर पर देखा गया था।

इम्तियाज जलील का 'संपूर्ण महाराष्ट्र' प्लान

निरूपम ने अपने आरोपों की धार को तेज करते हुए छत्रपति संभाजीनगर के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील का नाम भी इसमें घसीटा। निरूपम का दावा है कि जब मुंब्रा वाली टिप्पणी पर विवाद बढ़ा, तब इम्तियाज जलील ने कथित तौर पर इस एजेंडे को और व्यापक रूप दे दिया। निरूपम के अनुसार, जलील ने कहा था कि सिर्फ मुंब्रा को हरा नहीं करना है, बल्कि पूरे महाराष्ट्र को हरा करना है। निरूपम ने इस बयान को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय पहचान के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है।

धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय परिवर्तन का आरोप

संजय निरूपम ने इन बयानों को केवल राजनीतिक नारेबाजी मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इसे एआईएमआईएम का एक सुनियोजित प्लानिंग करार दिया। निरूपम का आरोप है कि मुंबई और महाराष्ट्र में धर्मांतरण के माध्यम से मुस्लिम आबादी को बढ़ाने का एक बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इन बयानों के पीछे का असली मकसद धर्मांतरण के जरिए जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ना और राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करना है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

निरूपम के इन आरोपों ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य में इस तरह के सांप्रदायिक एजेंडे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब निरूपम ने इस तरह के कड़े तेवर अपनाए हों, लेकिन इस बार उन्होंने सीधे तौर पर धर्मांतरण और ग्रीन एजेंडा को जोड़कर बहस को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

अब देखना यह है कि इम्तियाज जलील और एआईएमआईएम नेतृत्व इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है। लेकिन एक बात साफ है कि आने वाले चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में 'धर्मांतरण' और 'तुष्टिकरण' जैसे मुद्दे और भी ज्यादा गरमाने वाले हैं।

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