मनपा के नामकरण में गड़बड़ी (सोर्स: AI)
छत्रपति संभाजीनगर

नामकरण हुआ था पहले, फिर आया नया प्रस्ताव; छत्रपति संभाजीनगर में मनपा के रिकॉर्ड पर उठे सवाल

Sambhajinagar Municipal Naming Controversy: छत्रपति संभाजीनगर मनपा में पहले से नामित दो स्थानों के दोबारा नामकरण के प्रस्ताव मंजूर होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड पर सवाल उठे हैं।

शफीउल्ला हुसैनी, आलोक उमाकृष्ण

Municipal Naming Controversy Over Duplicate Names: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की आमसभा में नामकरण के प्रस्तावों को लेकर अजीबोगरीब स्थिति सामने आई है। 25 अगस्त की सभा में सम्राटनगर की एक खुली जगह को स्वामी विवेकानंद उद्यान और एमआईटी कॉलेज चौक को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी चौक नाम देने के प्रस्ताव मंजूर किए गए।

जबकि दोनों स्थानों का पहले ही नामकरण हो चुका है। इससे मनपा के नामकरण संबंधी कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। प्रभाग क्रमांक 26 के सम्राटनगर स्थित गट क्रमांक 91 की खुली जगह को स्वामी विवेकानंद उद्यान नाम देने का प्रस्ताव भाजपा नगरसेविका सविता कुलकर्णी और पदमसिंग राजपूत ने रखा था।

प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई

हालांकि, इसी जगह का 18 जुलाई 2019 की आमसभा में मां साहेब मीनाताई ठाकरे उद्यान नामकरण किया जा चुका है। खास बात यह है कि उस समय प्रस्ताव रखने वाले सिद्धांत शिरसाट और शिल्पाराणी वाडकर वर्तमान में भी सभागृह के सदस्य हैं।

एमआईटी चौक के नामकरण पर भी उठे सवाल

इसी आमसभा में MIT कॉलेज चौक का नाम बदलकर डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी चौक करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इस चौक और मार्ग का नामकरण पहले ही राजमाता अहिल्याबाई होलकर के नाम पर किया जा चुका है।

इसके बावजूद दोबारा नया नाम देने का प्रस्ताव सामने आने से मनपा के नामकरण और रिकॉर्ड व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह प्रस्ताव विजय वाघचौरे, राजू वैद्य, सूर्यकांत जायभाये और साधना सुरडकर ने संयुक्त रूप से रखा था। प्रस्ताव को आमसभा की मंजूरी मिलने के बाद मनपा के कामकाज को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सत्ता वापसी के बाद नामकरण को लेकर उठे सवाल

साढ़े पांच साल के प्रशासकीय कार्यकाल के बाद छत्रपति संभाजीनगर मनपा में भाजपा की सत्ता वापस लौटी है। ऐसे में शहरवासियों को उम्मीद है कि विकास कार्यों को तेजी मिलेगी और लंबित परियोजनाओं को गति दी जाएगी।

हालांकि, इसी बीच पहले से नामित स्थानों के दोबारा नामकरण के प्रस्ताव मंजूर होने से मनपा का कामकाज चर्चा में आ गया है। विकास के बजाय नामकरण को लेकर सामने आई यह स्थिति प्रशासनिक स्तर पर रिकॉर्ड के रखरखाव और प्रस्तावों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रही है।

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