

Rahul Dhoot Shares Journey: दो एकड़ जमीन, सीमित पूंजी और महज 15 कर्मचारियों से शुरू किया गया कारोबार आज कई देशों तक पहुंच सकता है। इसके लिए बाजार में होने वाले बदलावों को स्वीकार करना, नई तकनीक में निवेश करना और लगातार नए अवसर तलाशना जरूरी है।
धूत ट्रांसमिशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राहुल धूत ने छत्रपति संभाजीनगर में TiE CSN छत्रपती संभाजीनगर के शुभारंभ अवसर पर अपने उद्यमशील सफर के अनुभव साझा करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर से भी विश्वस्तरीय कंपनियां खड़ी की जा सकती हैं और स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की क्षमता शहर में है।
राहुल धूत ने बताया कि वर्ष 2000 में बेहद सीमित संसाधनों के साथ कारोबार शुरू किया गया था। उस समय कंपनी के पास केवल दो एकड़ जमीन, छोटी उत्पादन इकाई और 15 कर्मचारी थे। वायरिंग हार्नेस के निर्माण से शुरुआत हुई। इसके बाद बजाज ऑटो, होंडा, सुजुकी, टीवीएस और रॉयल एनफील्ड जैसी प्रमुख वाहन कंपनियों के साथ काम करने के अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि कारोबार के विस्तार के साथ कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उत्पादन प्रक्रिया के कई हिस्सों को अपने नियंत्रण में लेकर बैकवर्ड इंटीग्रेशन किया गया। इससे कंपनी को लागत, गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता के स्तर पर मजबूती मिली।
धूत ने बताया कि कंपनी ने आगे बढ़ते हुए ब्रिटेन और स्लोवाकिया में अधिग्रहण के माध्यम से उच्च तकनीकी क्षमताएं हासिल कीं। इसके बाद थाईलैंड, जापान, जर्मनी और वियतनाम जैसे देशों में कारोबार का विस्तार किया गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवसाय की सफलता के लिए केवल घरेलू बाजार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। वैश्विक बाजार में हो रहे बदलावों को समझकर उसके अनुसार कारोबार की रणनीति तैयार करनी होती है।
ऑटोमोबाइल उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए धूत ने कहा कि तकनीकी बदलाव को चुनौती मानने के बजाय उसे अवसर में बदलना चाहिए। पारंपरिक वाहन उद्योग से इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र की ओर बढ़ते बदलाव को कंपनी ने समय रहते स्वीकार किया।
इसके अनुरूप ईवी क्षेत्र के लिए नए उत्पादों और तकनीकों पर काम किया गया। उन्होंने उद्यमियों से कहा कि लगातार बदलाव स्वीकार करना, तकनीक में निवेश करना और वैश्विक अवसरों की तलाश करना व्यवसाय को आगे ले जाने के लिए बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में टाय छत्रपति संभाजीनगर (टाय सीएसएन) अध्याय का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इसका उद्देश्य मराठवाड़ा के उद्यमियों, उद्योगों और स्टार्टअप को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के अवसरों से जोड़ना है। टाय सीएसएन, टाय पुणे के मार्गदर्शन में ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर काम करेगा।
इसके माध्यम से स्थानीय उद्यमियों को मार्गदर्शन, उद्यमशील शिक्षा, व्यावसायिक संपर्क, इनक्यूबेशन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। स्थापना से पहले ही करीब 50 सदस्य इससे जुड़ चुके हैं, जबकि 19 चार्टर सदस्यों का संस्थापक समूह तैयार किया गया है।
टाय की स्थापना 1992 में सिलिकॉन वैली में हुई थी। वर्तमान में 14 देशों में इसके 66 अध्याय हैं। इनमें 33 अध्याय भारत में हैं। टाय के वैश्विक नेटवर्क में 5 हजार चार्टर सदस्य और 12 हजार से अधिक सदस्य जुड़े हैं। अब इस नेटवर्क के माध्यम से छत्रपति संभाजीनगर के उद्यमियों को वैश्विक विशेषज्ञों, निवेशकों और कारोबारी अवसरों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
TiE CSN का लक्ष्य शहर के पारंपरिक उद्योगों, पहली पीढ़ी के उद्यमियों, युवा स्टार्टअप संस्थापकों, तकनीकी क्षेत्र, प्रतिभाशाली मानव संसाधन और शैक्षणिक संस्थानों को वैश्विक उद्यमशीलता तंत्र से जोड़ना है। इसका मूल विचार है कि कारोबार छत्रपति संभाजीनगर में खड़ा हो और उसका विस्तार पूरी दुनिया में हो।
कार्यक्रम में बागला समूह के प्रबंध निदेशक ऋषी कुमार बागला सम्माननीय अतिथि तथा धूत ट्रांसमिशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राहुल धूत प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। टाय ग्लोबल के प्रतिनिधि कमल अग्रवाल, टाय पुणे के अध्यक्ष अजय भागवत सहित उद्यमी, पदाधिकारी और चार्टर सदस्य मौजूद रहे।
ऋषी कुमार बागला ने अपने उद्यमशील अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोगों पर विश्वास करना, स्वामित्व से अधिक बेहतर प्रबंधन को महत्व देना और अपने वादे को निभाना कारोबार की सफलता के मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि व्यवसाय केवल रोजगार या आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है।
टाय पुणे के सहयोग से स्थानीय उद्यमियों को टायकोन पुणे, ‘नर्चर’ सहित राष्ट्रीय और वैश्विक कार्यक्रमों में भाग लेने के अवसर मिलेंगे। भविष्य में टाय ग्लोबल समिट छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित करने की महत्वाकांक्षा भी व्यक्त की गई। स्थानीय उद्योगों की जरूरत के अनुसार मार्गदर्शकों का नेटवर्क तैयार करने के साथ संस्थागत प्रबंधन, नियमों का पालन, दस्तावेजीकरण, उत्तराधिकार योजना और अगली पीढ़ी के नेतृत्व विकास पर भी जोर दिया जाएगा।