Sambhajinagar Baby Sale 4 Accused: जिस उम्र में बच्चे को मां की गोद और माता-पिता की देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र में डेढ़ महीने के मासूम का कथित तौर पर 1.20 लाख रुपये में सौदा किए जाने का मामला छत्रपति संभाजीनगर जिले की मुकुंदवाडी क्षेत्र में सामने आया है।
आरोप है कि आर्थिक परेशानी के कारण मां-बाप ने अपने बच्चे को एक महिला को सौंप दिया। हालांकि अगले ही दिन दोनों ने रुपये वापस कर बच्चे को लौटाने की मांग की, लेकिन महिला ने बच्चे को अपनी बहन के पास भेजने की बात कही। इसके बाद भी बच्चा वापस नहीं मिला। अब पुलिस बच्चे की तलाश में जुटी है।
मामले में बच्चे के माता-पिता सहित चार लोगों के खिलाफ मुकुंदवाड़ी थाने में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की पहचान वंदना योगेश कांबले (36), योगेश रामप्रसाद कांबले (30), सीमा अनिल रेशवाल और कौशल्या बारकू पवार (65) के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, वंदना की प्रसव घाटी अस्पताल में हुई थी। इसी दौरान उसकी पहचान कौशल्या पवार से हुई। कौशल्या ने कथित तौर पर वंदना से कहा कि उसका पति शराब पीता है और बच्चे की देखभाल करना मुश्किल होगा। उसने अपनी बेटी सीमा के बच्चे को लेने की बात कही।
शुरुआत में वंदना ने बच्चे को देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, पुलिस शिकायत के अनुसार, सीमा और कौशल्या लगातार बच्चे को देने के लिए दबाव बनाती रहीं। सीमा ने बच्चे के बदले एक लाख रुपये देने की बात कही थी।
7 अगस्त को वंदना और उसका पति योगेश बच्चे को लेकर सीमा के घर पहुंचे। अगले दिन भी बातचीत हुई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बच्चे को सौंपने पर सहमति बनी। शिकायत के मुताबिक, सीमा के घर पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए और वंदना-योगेश को 1.20 लाख रुपये नकद दिए गए।
इसके बाद डेढ़ महीने के बच्चे को सीमा के हवाले कर दिया गया। हालांकि यह कथित सौदा ज्यादा समय तक नहीं चला। अगले ही दिन बच्चे के माता-पिता ने रुपये वापस करने और बच्चा लौटाने की मांग की। सीमा ने कथित तौर पर बताया कि बच्चा उसकी बहन के पास है और अगले दिन उसे वापस ले आएगी।
इसके बाद कई बार बच्चे के बारे में पूछताछ की गई, लेकिन कथित तौर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शिकायत में कहा गया है कि सीमा और कौशल्या बच्चे के ठिकाने को लेकर टालमटोल करती रहीं। यही वजह है कि अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल बच्चे की सुरक्षा और उसके वर्तमान ठिकाने का है।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने घाटी अस्पताल के प्रसव विभाग का अभिलेख प्राप्त किया। पुलिस ने वंदना और योगेश के बयान भी दर्ज किए। शिकायत के अनुसार, दोनों ने बच्चे को 1.20 लाख रुपये में सीमा को सौंपने की बात स्वीकार की है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं तथा बाल न्याय अधिनियम की धारा 81 के तहत चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सहायक पुलिस निरीक्षक घुगे मामले की जांच कर रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर पुलिस अब बच्चे को सुरक्षित बरामद करने के साथ ही यह पता लगाने में जुटी है कि उसे किसके पास और किन परिस्थितियों में रखा गया है।
इस मामले ने नवजात बच्चों की सुरक्षा और आर्थिक मजबूरी के नाम पर बच्चों को दूसरे लोगों को सौंपने की गंभीरता को भी सामने ला दिया है। जांच के दौरान बच्चे के वास्तविक ठिकाने और कथित लेन-देन से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।