मराठवाड़ा में 157 गांवों में 295 टैंकर, 553 कुएं अधिग्रहित सोर्स: सोशल मीडिया
छत्रपति संभाजीनगर

Sambhajinagar: मराठवाड़ा में पेयजल संकट गहराया, 157 गांवों और 103 बस्तियों में 295 टैंकरों से बुझ रही प्यास

Chhatrapati Sambhajinagar Marathwada Water Crisis: मराठवाड़ा में पेयजल संकट गहराने से 157 गांवों और 103 बस्तियों में 295 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। छह जिलों में 553 कुएं अधिग्रहित किए गए हैं।

मनीषा बोंदरे

Chhatrapati Sambhajinagar Marathwada Water Crisis Water Tankers: छत्रपति संभाजीनगर. मराठवाड़ा में अपेक्षित बारिश नहीं होने से पेयजल संकट लगातार गहरा रहा है। वर्तमान में 157 गांवों और 103 बस्तियों में 295 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। संभावित जल संकट को देखते हुए छह जिलों में 553 कुएं भी अधिग्रहित किए गए हैं।

157 गांवों में टैंकरों से जलापूर्ति

छत्रपति संभाजीनगर. मराठवाड़ा में सूखे का असर अब पेयजल व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बारिश अपेक्षित मात्रा में नहीं होने से जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो सका। इसका नतीजा यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

वर्तमान में मराठवाड़ा के 157 गांवों और 103 बस्तियों में पानी की आपूर्ति के लिए 295 टैंकर लगाए गए हैं। खास बात यह है कि पिछले महज 10 दिनों में ही टैंकरों की संख्या में 50 से अधिक की वृद्धि हुई है। इससे क्षेत्र में बढ़ते पेयजल संकट का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बारिश के बाद भी खत्म नहीं हुई टैंकरों की जरूरत

गर्मी शुरू होते ही मराठवाड़ा के सभी आठ जिलों में पानी की कमी वाले गांवों में चरणबद्ध तरीके से टैंकरों के जरिए जलापूर्ति शुरू की गई थी। मानसून शुरू होने के बाद प्रशासन को उम्मीद थी कि बारिश के कारण जलस्रोतों में पानी जमा होगा और टैंकरों की जरूरत कम हो जाएगी।

हालांकि, पूरे क्षेत्र में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण कई जलस्रोत लगातार सूखते गए। जून के बाद भी ग्रामीणों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ा। जुलाई के अंतिम सप्ताह में परभणी को छोड़कर मराठवाड़ा के अन्य सात जिलों के 257 गांवों और 130 बस्तियों में 428 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा था।

जुलाई में हुई बारिश के बाद अगस्त के पहले सप्ताह में टैंकरों की संख्या में कुछ कमी आई थी। लेकिन इसके बाद अधिकांश क्षेत्रों में संतोषजनक बारिश नहीं होने से जलसंकट फिर गहराता चला गया।

छह जिलों में 553 कुएं अधिग्रहित

30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने हिंगोली और नांदेड को छोड़कर मराठवाड़ा के छह जिलों में कुल 553 कुओं का अधिग्रहण किया है। इनमें निजी कुएं भी शामिल हैं।

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर में 41, जालना में 24, परभणी में 3, बीड में 60, लातूर में 230 और धाराशिव में 195 कुएं अधिग्रहित किए गए हैं।

जलस्रोतों पर बढ़ता दबाव

टैंकरों की बढ़ती संख्या और कुओं के अधिग्रहण से साफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यदि पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो प्रशासन के सामने टैंकरों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उपलब्ध जलस्रोतों के प्रभावी प्रबंधन की चुनौती भी बनी रहेगी।

नौकरशाही से सियासत तक: दिव्या मित्तल के बाद एम नागेश्वर राव की राजनीति में एंट्री, क्या UP में बदल रहा ट्रेंड?

पीएम किसान योजना: 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसान पोर्टल पर तुरंत करें ये काम, नहीं अटकेगा पैसा

कोलकाता में मनाया जाएगा 19वां प्रवासी भारतीय दिवस, Gen-Z के लिए विशेष सेगमेंट; शेड्यूल जारी

अगर डॉलर के मुकाबले 99 तक गिरा रुपया, तो महंगा होगा पेट्रोल, पढ़ाई और विदेशी यात्रा, जानें किसको होगा लाभ

खुले आकाश में परिंदों की लंबी उड़ान, राजस्थान के जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क से आई खूबसूरत तस्वीरें