संभाजीनगर महानगरपालिका महापौर और आयुक्त (सोर्सः सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

गौरी पूजा के बहाने बदला संभाजीनगर मनपा का सियासी सुर, AIMIM पार्षदों की मांग के बाद महापौर ने स्थगित की बैठक

MIM BJP Alliance Gauri Puja: संभाजीनगर महानगरपालिका की आम सभा में शुक्रवार को अलग ही नजारा देखने को मिला। AIMIM ने गौरी पर्व और महिला पार्षदों की उपस्थिति का हवाला देकर बैठक स्थगित करने की मांग की।

शफीउल्ला हुसैनी, आंचल लोखंडे

Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की आम सभा में शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चलने वाली राजनीतिक खींचतान के बजाय अलग ही तस्वीर दिखाई दी। एआईएमआईएम की ओर से गौरी पर्व के कारण शुक्रवार को आयोजित मनपा की आम सभा स्थगित करने की मांग रखी गई, जिसे भाजपा और शिवसेना के नेताओं ने भी समर्थन दे दिया। इसके बाद महापौर समीर राजूरकर ने सभा स्थगित करने की घोषणा कर दी।

मनपा में नई सत्ता व्यवस्था बनने के बाद एमआईएम विपक्ष की भूमिका में है। ऐसे में सामान्य सभाओं में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर टकराव देखने को मिलता रहा है। लेकिन शुक्रवार को धार्मिक पर्व को लेकर रखी गई विपक्ष की मांग पर सत्ता पक्ष के नेताओं के एक साथ आने से सदन का राजनीतिक माहौल चर्चा का विषय बन गया।

संभाजीनगर मनपा बैठक

महिला पार्षदों की अनुपस्थिति का दिया हवाला

महापौर समीर राजूरकर की अध्यक्षता में शुक्रवार सुबह 11 बजे आम सभा शुरू हुई। कार्यवाही की शुरुआत में एमआईएम के विरोधी पक्ष नेता समीर साजेद बिल्डर ने गौरी पर्व का उल्लेख करते हुए सभा स्थगित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि घरों में गौरी पूजन और प्रसाद की व्यवस्था के कारण महिला पार्षदों के लिए सभा में उपस्थित रहना कठिन हो सकता है। इसलिए बैठक को आगे की तारीख तक स्थगित किया जाए।

भाजपा पार्षद ने की मांग की सराहना

एमआईएम की इस मांग पर भाजपा पार्षद राजू वैद्य ने समर्थन जताया। उन्होंने एमआईएम की ओर से हिंदू पर्व को ध्यान में रखते हुए रखी गई मांग की सराहना की। इसके बाद सदन के नेता गोविंद केंद्रे और शिवसेना के गुट नेता किशोर नागरे ने भी सभा स्थगित करने की मांग का समर्थन किया। चारों ओर से समर्थन मिलने के बाद महापौर समीर राजूरकर ने सामान्य सभा स्थगित कर दी।

राजनीतिक टकराव के बीच दिखी अलग तस्वीर

मनपा चुनाव के बाद भाजपा और शिवसेना सत्ता में हैं, जबकि एमआईएम विपक्ष में है। चुनाव परिणामों में एमआईएम के 33 पार्षद चुने गए थे। सत्ता पक्ष और एमआईएम के बीच विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे माहौल में शुक्रवार को एमआईएम की धार्मिक पर्व से जुड़ी मांग और भाजपा-शिवसेना के समर्थन ने सदन की सामान्य राजनीतिक तस्वीर को कुछ समय के लिए बदल दिया।

सदन में बनी सहमति, चर्चा में आया नया राजनीतिक संकेत

गौरी पर्व को लेकर शुरू हुई मांग पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तत्काल सहमति बन गई। एमआईएम ने महिला पार्षदों की सुविधा को आधार बनाया, जबकि भाजपा और शिवसेना के नेताओं ने इसका समर्थन किया। सामान्य सभा स्थगित होने के साथ ही यह घटनाक्रम महानगरपालिका के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

संभाजीनगर मनपा बैठक

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