बड़े भूखंडों पर 20% आवास आरक्षित रखना अनिवार्य।
म्हाडा ने निर्माण मंजूरी रद्द करने की मांग की।
23 बिल्डरों के खिलाफ दर्ज मामले की जांच जारी है।
Builders MHADA Housing Reservation: आर्थिक रूप से कमजोर और कम आय वाले परिवारों को सस्ते घर उपलब्ध कराने की सरकारी योजना की अनदेखी करना छत्रपति संभाजीनगर के 23 बिल्डरों को भारी पड़ गया है।
निजी भूखंडों पर निर्माण के दौरान अनिवार्य रूप से आरक्षित रखे जाने वाले 20 प्रतिशत आवास और भूखंड महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) को हस्तांतरित नहीं करने के मामले में संबंधित बिल्डरों के खिलाफ क्रांतिचौक पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया गया है।
इनमें पांच आवासीय और 18 भूखंड परियोजनाएं शामिल हैं। बार-बार सूचना देने और बैठक में निर्देश जारी होने के बावजूद नियमों का पालन नहीं किए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। म्हाडा के उपअभियंता ऋषिकेश रवींद्र व्यापारी की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज हुआ है।
शिकायत के अनुसार, संबंधित बिल्डरों ने निर्माण अनुमति और भूखंड विकास की मंजूरी लेते समय आरक्षित हिस्से का प्रावधान तो दर्शाया, लेकिन निर्धारित आवास और भूखंड म्हाडा को हस्तांतरित नहीं किए। इससे जरूरतमंद परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की योजना प्रभावित होने की बात शिकायत में कही गई है।
शासन की 8 नवंबर 2013 की अधिसूचना और एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन नियमावली 2020 के नियम 3.8.2 के अनुसार, दस लाख से अधिक आबादी वाले महानगरपालिका क्षेत्रों में चार हजार वर्गमीटर या उससे बड़े निजी भूखंडों के विकास में 20 प्रतिशत हिस्सा समावेशी आवास योजना के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।
इस नियम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और अल्प आय वर्ग के परिवारों को किफायती दरों पर घर उपलब्ध कराना है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित बिल्डरों ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की।
म्हाडा की ओर से संबंधित बिल्डरों को कई बार लिखित सूचनाएं दी गईं। इसके बावजूद आरक्षित हिस्सा हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। 23 सितंबर 2026 को उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी बिल्डरों को आवश्यक निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी अधिकांश मामलों में अनुपालन नहीं होने का उल्लेख शिकायत में किया गया है।
एक भूखंड परियोजना का मामला 29 अगस्त 2022 से लंबित था। शिकायत के अनुसार, संबंधित भूखंड का हस्तांतरण आखिरकार 16 अक्टूबर 2026 को पंजीकृत समझौते के माध्यम से किया गया। लंबे समय तक मामला लंबित रहने का भी शिकायत में उल्लेख है।
म्हाडा ने संबंधित बिल्डरों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की मांग भी की है। उनके बिक्री हिस्से में आने वाले आवासों और भूखंडों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने के लिए पंजीकरण विभाग से पत्राचार किया गया है।
इसके अलावा छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त से निर्माण अनुमति और भूखंड विकास की मंजूरी रद्द करने, निर्माण कार्य रोकने तथा भोगवटा प्रमाणपत्र और निर्माण पूर्णता प्रमाणपत्र जारी नहीं करने का अनुरोध किया गया है। महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है।
भूखंड महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण की शिकायत में अमीन अब्दुल्ला सुराणी, कमरुद्दीन करीम भारवाणी (नमो रियल्टी), दिलीपकुमार बाकलीवाल, भावेन भास्करभाई अमीन (ए.एम. पटेल इन्फ्रा), मधुकर विठ्ठल सूर्यवंशी (सम्यक निवास हक्क संघ/भीम फाउंडेशन), किरीट लल्लुभाई चितालिया (ओमकार इन्फ्रा डेवलपर्स), त्रिलोक सिंह तारा सिंह जबिंदा, प्रल्हाद हरिराम पन्हाले (पियुष इन्फ्राटेक), रमेश खत्री (जे.के. सहकारी गृहनिर्माण संस्था), सुमित त्रिवेदी, शिव किशोर त्रिवेदी, सिद्धार्थ कांकरिया, प्रमोद मुथा, सुखलाल यादव, सुमतीलाल मुनोत, संपतलाल मुथा (यूनिक डेवलपर्स), प्रभाकर देशमुख, यासिन खान, अनिल बलीराम पाटील, सुरेखा अशोक पाटील, रवींद्र साने, शैला तोनगिरे, इकबाल पटेल, अनुराधा बिरादार, गणेश सोयगावकर, मिलिंद बापट, विजय कुमार शर्मा, दिलीप मुले, अनिरुद्ध सोमाणी, अमित सानप, प्रतिभा तिलवणकर और उल्हास शिऊरकर सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों तथा भागीदारों के नाम शामिल हैं। आर.एम.आर.एन. वेंचर्स सहित अन्य फर्मों से जुड़े लोगों का भी उल्लेख है।
उपअभियंता ऋषिकेश व्यापारी की शिकायत पर क्रांतिचौक पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस निरीक्षक शिवाजी चौरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच में संबंधित बिल्डरों की भूमिका और आरक्षित आवासों तथा भूखंडों के हस्तांतरण में कथित अनियमितताओं की पड़ताल की जाएगी। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।