

सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर उठा सवाल
वकील विशाल तिवारी ने दायर की जनहित याचिका
मतदाता सूची और EVM के मुद्दो को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका
Questions Raised Regarding The Functioning Of The ECI: विपक्ष के द्वारा लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर प्रक्रिया में खामियों का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में भारतीय निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित संस्थागत खामियों की जांच कराने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।
जनहित याचिका में आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है। यह याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दाखिल की गई है।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, निर्णय लेने की प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्थाओं की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है, ताकि भविष्य में संस्थागत सुधार किए जा सकें। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या पद पर बैठे किसी व्यक्ति के खिलाफ फैसला हासिल करना नहीं है। साथ ही, याचिका में किसी चुनाव के परिणाम को चुनौती नहीं दी गई है।
EVM और मतदाता सूची की व्यवस्था पर भी सवाल
दायर याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की तकनीक, उसकी कार्यप्रणाली और सुरक्षा संबंधी नियमों की व्यापक जांच कराने की मांग की गई है। इसमें यह परखने की बात कही गई है कि ईवीएम की व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों और तकनीकी सुरक्षा के निर्धारित स्तरों के अनुरूप है या नहीं।
इसके अलावा, मतदाता सूचियों में संशोधन और मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई गई है। याचिका में महाराष्ट्र की मसौदा मतदाता सूची में 2,70,313 मतदाताओं की उम्र 101 से 150 वर्ष के बीच दर्ज होने संबंधी रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। इस मामले को जन्म-वर्ष से जुड़ी तकनीकी त्रुटि से संबंधित बताया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए, जिससे किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने का जोखिम कम किया जा सके।
चुनाव आयोग के एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहा है। सीजेपी ने देशव्यापी प्रदर्शन किया। चुनाव आयोग पर सरकार का दबाव जैसा आरोप भी लगता है। इसी बीच दायर याचिका ने नई बहस छेड़ दी है।