Abhijeet Dipke Protest Sambhajinagar: महाराष्ट्र में रविवार, 16 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट की क्लर्क भर्ती के लिए आयोजित टाइपिंग परीक्षा एक बड़े विवाद और जनाक्रोश का केंद्र बन गई है। परीक्षा केंद्रों पर हुए भारी कुप्रबंधन और तकनीकी खामियों के विरोध में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर 'ठिय्या आंदोलन' शुरू कर दिया है।
इस आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के कूदने से मामला और भी गरमा गया है। दीपके ने इसे जंतर-मंतर पार्ट 2 करार देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, यह लड़ाई संभाजीनगर की सड़कों पर ही लड़ी जाएगी।
रविवार को राज्यभर के विभिन्न केंद्रों पर यह टाइपिंग टेस्ट आयोजित किया गया था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होते ही अव्यवस्थाओं का अंबार लग गया। अभिजीत दीपके ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि कई अभ्यर्थियों के कंप्यूटर के माउस काम नहीं कर रहे थे और कीबोर्ड खराब स्थिति में थे।
हद तो तब हो गई जब परीक्षा शुरू होने के महज 10 मिनट के भीतर ही बड़ी संख्या में छात्र सिस्टम से अपने आप लॉग आउट हो गए और बाद में उन्हें 'फेल' घोषित कर दिया गया। दीपके ने इसे पूरी तरह से व्यवस्था और सरकार की विफलता बताया है।
आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके ने अधिकारियों के व्यवहार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि जब परेशान छात्रों ने केंद्र के अधिकारियों से अपनी शिकायत दर्ज कराई, तो समाधान देने के बजाय अधिकारियों ने छात्रों का अपमान किया।
कथित तौर पर अधिकारियों ने कहा कि छात्रों को एग्जाम देने की अक्ल नहीं है। इस पर पलटवार करते हुए दीपके ने कहा कि यदि अधिकारियों में इतनी ही अक्ल है, तो उन्हें पहले बेहतर बुनियादी ढांचा, वर्किंग कीबोर्ड और मजबूत सर्वर सुनिश्चित करना चाहिए था।
अभिजीत दीपके ने हाल ही में अपने दिल्ली दौरे के दौरान जंतर-मंतर सीजन 2 शुरू करने के संकेत दिए थे। संभाजीनगर के परीक्षा केंद्र के बाहर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बैठकर उन्होंने घोषणा की, अब यही है जंतर-मंतर।
उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि जब तक परीक्षा दोबारा आयोजित करने का ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक वे अपनी जगह से पीछे न हटें। उन्होंने महाराष्ट्र के अन्य केंद्रों के छात्रों से भी अपील की है कि वे वहीं बैठकर विरोध दर्ज कराएं।
छात्रों की मांग है कि चूंकि एग्जाम सेंटर के भीतर जिला न्यायालय के जज मौजूद थे, इसलिए उन्हें खुद बाहर आकर छात्रों की समस्याएं सुननी चाहिए। दीपके ने मांग की है कि न्यायाधीश लिखित में यह गारंटी दें कि परीक्षा फिर से ली जाएगी और इस बार पुराने व खराब कंप्यूटरों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
अमरावती, बीड़, लातूर और अंबेजोगाई जैसे दूर-दराज इलाकों से आए छात्रों का भविष्य अब दांव पर लगा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि हाई कोर्ट प्रशासन और सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच क्या फैसला लेती है। फिलहाल, छत्रपति संभाजीनगर का यह आंदोलन पूरे महाराष्ट्र के परीक्षार्थियों के लिए न्याय की उम्मीद बन गया है।