चंद्रपुर में आंदोलन (सौजन्य-नवभारत) 
चंद्रपुर

जनसुरक्षा कानून का दिखने लगा असर, आंदोलनकारियों पर मकोका के तहत FIR दर्ज

Chandrapur News: जनसुरक्षा कानून पारित हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ कि अब इसका असर सीधे-सीधे देखने को मिल रहा है। चंद्रपुर में जनसुरक्षा विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया गया।

प्रिया जैस

Chandrapur News: चंद्रपुर में जनसुरक्षा विधेयक के खिलाफ जन आक्रोश देखने को मिला। ब्रम्हपुरी के छत्रपति शिवाजी चौक में आंदोलनकारियों ने जनसुरक्षा विधेयक हटाओ संघर्ष समिति के बैनर तले महाराष्ट्र विशेष जनसुरक्षा का अधिनियम बिल रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन किया और इस विधेयक की प्रतिकात्मक प्रतियों की होली की।

इस आंदोलन का नेतृत्व करनेवाले प्रेमलाल मेश्राम, विनोद झोडगे, मोंटू उर्फ जगदीश पिलारे, लीलाधर वंजारी, संतोष रामटेके, जीवन बागडे, मिलींद रंगारी समेत 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ब्रम्हपुरी पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

मकोका के तहत मामला दर्ज

ब्रम्हपुरी पुलिस का कहना है जिलाधिकारी चंद्रपुर द्वारा दिए गए आदेश एवं बीएनएसएस कलम 168 के तहत नियमों का उल्लंघन कर जनसुरक्षा विधयेक की प्रति को जलाया गया जिसके चलते बीएनएस कलम 223 सह कलम 135 मकोका के तहत मामले दर्ज किए गए है। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने 'महाराष्ट्र जनसुरक्षा विधेयक 2024' को संविधान विरोधी और लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ करार दिया है।

समिति का कहना है कि यह कानून जनता की सुरक्षा के नाम पर सत्ता पक्ष की सुरक्षा के लिए लाया गया है और राज्य में लोकतांत्रिक शक्तियों को कमजोर करने का प्रयास है। विधेयक के अंतर्गत 'अर्बन नक्सलवाद' पर नियंत्रण का उल्लेख है, लेकिन 'अर्बन नक्सलवादी' की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई, जिससे विरोधी विचार रखने वाले लोगों या संगठनों को अन्यायपूर्वक निशाना बनाया जा सकता है।

अवैध संगठन की सदस्यता, बैठक में भाग लेना या सहायता देने पर 3 वर्ष जेल या 3 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन को अधिकार दिए गए हैं, जिससे वह संदेह के आधार पर कठोर कार्यवाही कर सकता है, जिससे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन संभव है। कुछ प्रावधानों में सरकार को न्यायपालिका में हस्तक्षेप का अधिकार दिया गया है, जो निष्पक्ष न्यायपालिका के लिए खतरा है।

लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों पर पड़ेगा प्रभाव

चंद्रपुर की संघर्ष समिति के अनुसार, यह विधेयक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने का अधिकार और निष्पक्ष सुनवाई जैसे अधिकारों को प्रभावित करेगा। इसके जरिये नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का दमन और प्रशासन को अत्यधिक अधिकार देने का खतरा है।

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