प्रहार का राज्य में आंदोलन (सौजन्य-नवभारत, सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

प्रहार ने किया चक्काजाम, सरकार को दी चेतावनी, अतकरी की गिरफ्तारी से भड़का गुस्सा

राज्य में जगह-जगह कृषि मंत्री कोकाटे के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदारों के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।

प्रिया जैस

Prahar Agitation: राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों से आक्रोशित होकर प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेतृत्व में किसानों ने गुरुवार को नागपुर-अमरावती राष्ट्रीय महामार्ग स्थित गोंडखैरी टोल नाके पर तीव्र चक्का जाम आंदोलन किया। पूर्व मंत्री बच्चू कडू के नेतृत्व में आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया, जिसमें आक्रोशित किसानों ने एक शववाहिनी को आग के हवाले कर दिया।

आग लगाने की सूचना मिलते ही कलमेश्वर नगर परिषद का अग्निशमन दल मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कुछ समय के लिए महामार्ग पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया और क्षेत्र में तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया था।

आंदोलनकारी आक्रोशित

किसानों की प्रमुख मांग सातबारा कोरा (कर्ज मुक्त प्रमाणपत्र) देने की थी। आंदोलन के दौरान पुलिस और दंगा नियंत्रण दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 से 12 प्रहार कार्यकर्ताओं व किसानों को हिरासत में लिया। इससे आंदोलनकारी और अधिक आक्रोशित हो उठे।

अतकरी की गिरफ्तारी से रोष

इससे पहले, 23 जुलाई की रात नागपुर ग्रामीण पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के प्रहार पार्टी के जिला सचिव रजनीकांत अतकरी को वडधामना से हिरासत में ले लिया था, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी रोष फैल गया। आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, जब मंत्री कृषि जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा करने के बजाय मोबाइल पर कुछ खेलने में व्यस्त हों। तो हमें अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना ही पड़ेगा।

सरकार को दी चेतावनी

आंदोलकों ने प्रशासन से यह सवाल भी किया कि किसान आंदोलनों का ही दमन क्यों किया जाता है? शिक्षकों, एसटी चालकों, ऑटो चालकों के आंदोलन होते हैं, लेकिन पुलिस का विरोध केवल किसानों के आंदोलन में ही क्यों होता है? आंदोलनकारियों ने यह सवाल उठाते हुए प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में प्रहार जनशक्ति पार्टी के कार्यकर्ता और किसान उपस्थित थे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

राज्य के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे पिछले कुछ दिनों से किसानों के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। किसानों को भिखारी कहने वाले कोकाटे ने अब विधानसभा में जुआ खेलने जैसा निंदनीय कृत्य किया है। ऐसे असंवेदनशील मंत्रियों को तुरंत उनके पदों से हटा दिया जाना चाहिए। गोंडपिपरी में कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी और तालुका के किसानों ने किसानों का अपमान करने के लिए उनके खिलाफ मामला दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।

ताश के पत्ते फेंककर प्रदर्शन

गुरुवार (24) को तालुका के छत्रपति शिवाजी चौक पर किसानों ने भारी बारिश में ताश के पत्ते फेंककर कृषि मंत्र का विरोध किया। राज्य में किसानों की हालत बेहद खराब है। किसानों की आत्महत्याओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। सरकार कर्ज माफ करने को तैयार नहीं है और कुछ जगहों पर बारिश की कमी के कारण बुवाई में देरी हो रही है।

जब किसानों के लिए दोबारा बुआई का समय आया तो कुछ इलाकों में अतिवृष्टि के कारण किसानों की फसलें नष्ट हो गईं। जब राज्य में किसानों की हालत पहले से ही खराब थी, तब सरकार के नुमाइंदे उनके जख्मों पर नमक छिड़क रहे थे। कृषि मंत्री कोकाटे, जिनकी ओर किसानों को उम्मीद से देखना चाहिए, संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पर पहुंच रहे हैं।

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