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करंजी MIDC के लिए प्रस्तावित भूसंपादन के खिलाफ किसानों ने अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देने का ऐलान किया।
किसानों का कहना है कि मामला न्यायालय में लंबित है और स्टेटस को के बावजूद प्रशासन सुनवाई प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
गोंडपिपरी में जिलाधिकारी और विधायक की मौजूदगी में हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद किसानों ने बोरगांव में परिषद आयोजित की।
Chandrapur Farmers Protest: चंद्रपुर जिले के गोंडपिपरी तहसिल के करंजी एमआईडीसी के लिए प्रस्तावित भूसंपादन के मुद्दे पर 13 गांवों के किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। 'खेती हमारी, हक हमारा; नहीं किसी के बाप का' और 'जमीन हमारी, भाव तय करने वाले तुम कौन?' जैसे नारों के साथ किसानों ने अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देने का ऐलान किया है।
न्यायालय में मामला लंबित रहने और भूसंपादन प्रक्रिया पर स्टेटस को होने के बावजूद प्रशासन की ओर से सुनवाई शुरू किए जाने से किसानों में नाराजगी है। शुक्रवार को जिलाधिकारी और विधायक की उपस्थिति में गोंडपिपरी में हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद शनिवार को बोरगांव में आयोजित तीसरी किसान परिषद में आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया गया।
करंजी एमआईडीसी के प्रस्तावित भूसंपादन के विरोध में किसान एकता संघर्ष कृती समिति के नेतृत्व में 13 गांवों के किसानों का आंदोलन जारी है। किसानों की मांग है कि न्यायालयीन प्रकरण और स्टेटस को को देखते हुए सुनवाई प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए, प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण किसानों में असंतोष बढ़ता गया।
परिषद में किसान एकता संघर्ष समिति के अध्यक्ष मारोती भोयर, सचिव माधव लडके, कोर कमेटी सदस्य शालीकराव माऊलीकर, राजेश कवठे, कमलेश निमगडे, सचिन फुलझेले, संजय वडस्कर, सूरज माडुरवार, अतुल झाडे और अमित भसारकर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। संचालन विपिन मोरे ने किया।
बैठक में उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एड. दीपक चटप और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर वडेट्टीवार प्रमुख रूप से उपस्थित थे। परिषद में 13 गांवों के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं और विरोध की भूमिका रखी। इसके बाद एड. दीपक चटप ने किसानों को भूसंपादन मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से कानूनी लड़ाई के साथ एकजुट रहकर आंदोलन मजबूत करने का आह्वान किया।