Chandrapur Road Problem: एक ओर रेलवे उड़ान पुल शुरू होने से राजीव रतन चौक स्थित रेलवे गेट की वर्षों पुरानी समस्या से घुग्घुसवासियों को राहत मिली है, तो दूसरी ओर घुग्घुस-ताड़ाली मार्ग पर अधूरी पड़ी सड़क अब लोगों के लिए नई मुसीबत बनती जा रही है।
करोड़ों रुपए खर्च कर मुख्य सड़क का निर्माण किए जाने के बावजूद म्हातारदेवी रेलवे गेट और साखरवाही फाटा के पास करीब आधा किलोमीटर सड़क का हिस्सा अब तक अधूरा पड़ा है। यही अधूरा हिस्सा आए दिन यातायात व्यवस्था को पटरी से उतार रहा है।
सवाल यह है कि आखिर सड़क निर्माण में ऐसी कौन-सी अड़चन है, जिसके चलते वर्षों बाद भी यह काम पूरा नहीं हो सका ? घुग्घुस-ताड़ाली मार्ग क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। डब्ल्यूसीएल मुख्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, लायड्स गोयंका स्कूल के विद्यार्थी, औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोग तथा आसपास के गांवों के नागरिक इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़क का एक बड़ा हिस्सा अधूरा होना सीधे तौर पर यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।
करीब पांच वर्ष पहले घुग्घुस-ताड़ाली मार्ग की बदहाल स्थिति को देखते हुए घुग्घुस कांग्रेस की ओर से लगातार मांग उठाई गई थी। इसके बाद तत्कालीन सांसद स्वर्गीय सुरेश उर्फ बालू धनोरकर और विधायक किशोर जोरगेवार के प्रयासों से चंद्रपुर पीडब्ल्यूडी के माध्यम से करीब 16 करोड़ 55 लाख रुपए की निधि से टू-लेन कांक्रीट सड़क का निर्माण शुरू किया गया था।
भूमिपूजन के बाद मुख्य सड़क का काम लगभग एक वर्ष में पूरा भी कर लिया गया। लेकिन सड़क के कुछ हिस्से आज भी अधूरे हैं। म्हातारदेवी रेलवे गेट तथा साखरवाही फाटा-इन दोनों स्थानों पर मिलाकर करीब आधा किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
अधूरे हिस्से में सड़क की चौड़ाई कम होने तथा वाहनों के आवागमन में पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण भारी वाहन और छोटे वाहन आमने-सामने आने पर स्थिति बिगड़ जाती है। कई बार एक वाहन को किनारे करने की कोशिश में दूसरा वाहन फंस जाता है और देखते ही देखते दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
गुरुवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। एक ट्रक सड़क किनारे फंस जाने के बाद म्हातारदेवी रेलवे गेट के आसपास यातायात प्रभावित हो गया। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतार लग गई और काफी समय तक वाहन चालक जाम में फंसे रहे। इस ओर ध्यान देने की मांग की जा रही है।
सड़क निर्माण अधूरा रहने के पीछे वास्तविक वजह क्या है, यह तो पीडब्ल्यूडी विभाग ही स्पष्ट कर सकता है। क्या भूमि, रेलवे, तकनीकी अनुमति, प्रशासनिक प्रक्रिया या किसी अन्य कारण से काम रुका है? यह सवाल लंबे समय से अनुत्तरित है।
जब करोड़ों रुपए की निधि खर्च कर मुख्य सड़क का अधिकांश काम पूरा किया जा चुका है, तो फिर म्हातारदेवी रेलवे गेट और साखरवाही फाटा पर बचा हुआ हिस्सा आखिर कब पूरा होगा ? नागरिकों को इसका जवाब चाहिए। अब निगाहें पीडब्ल्यूडी विभाग पर हैं कि वह इस मामले में स्थिति स्पष्ट करता है या फिर नागरिकों को इसी तरह जाम और हादसे के खतरे के बीच सफर करना पड़ेगा।