Chandrapur Tribal Youth Education Awareness Program: चंद्रपुर जिले में सोशल मीडिया, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक समाजजीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। तेजी से बदलती दुनिया में खुद को बनाए रखने के लिए आदिवासी युवाओं को हीनभावना छोड़कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शैक्षणिक गुणवत्ता को अपनाना होगा।
ऐसा प्रतिपादन मानवविज्ञान के अभ्यासक एवं शैक्षणिक समुपदेशक अनिल दहागांवकर ने किया। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सावली तहसील के पाथरी स्थित बाजार चौक में आदिवासी समाज की ओर से आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम में वे प्रमुख मार्गदर्शक के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने चमत्कारों का पर्दाफाश करने वाले विभिन्न प्रात्यक्षिक प्रस्तुत करते हुए कहा कि अंधविश्वास का त्याग किए बिना समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल अधिकारी किशोर उड़के ने की।
मानव विकास के साथ वर्तमान समय में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में हो रहे बदलावों तथा उनके समाजजीवन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए दहागांवकर ने कहा कि आदिवासी समाज को आपसी गुटबाजी और मतभेद भुलाकर विशेष रूप से युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए संगठित होकर सक्रिय रूप से आगे बढ़ना समय की जरूरत है।
अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के जिला सचिव एवं मानसिक स्वास्थ्य समुपदेशक धनंजय तावाडे ने समाज में व्याप्त अमानवीय एवं विघातक अंधविश्वास, मानसिक बीमारियों तथा जादू-टोना विरोधी कानून के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन किया।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मडावी, दिवाकर सुरपाम, विश्वनाथ वेरमे, राजेश सिद्धम, पूर्व सरपंच तुकाराम ठिकरे, पूर्व पंस सदस्य दिलीप ठिकरे, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट विवेक ठाकरे, देवराव राऊत, श्रीनिवास सहारे, किशोर मडावी, राजेश सुरपाम, नरेश नैताम, विराज सुरपाम और निखिल कोडापे सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित थे।
इस परिप्रेक्ष्य में जनजागृति रैली का भी आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का प्रास्ताविक अतुल बेरमे ने किया, संचालन गणेश उईके ने किया, जबकि मोहित मेश्राम ने आभार माना, गांव के नागरिक, युवा, छात्र आदि बडी संख्या में मौजूद थे।