चंद्रपुर CTPS फाईल फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया)  
चंद्रपुर

चंद्रपुर CTPS में बड़ी कार्रवाई! ट्यूब लीकेज मामले में दो वरिष्ठ इंजीनियर निलंबित

Chandrapur CTPS News: चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन की यूनिट 8 व 9 में बार-बार ट्यूब लीकेज के बाद बड़ी कार्रवाई। लापरवाही के आरोप में दो वरिष्ठ इंजीनियर निलंबित; जांच के बाद एक्शन।

केतकी मोडक

Chandrapur CTPS Tube Leakage Investigation: महाराष्ट्र की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पावर स्टेशन की महत्वपूर्ण इकाइयों में लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों और बिजली उत्पादन में हो रहे व्यवधान को गंभीरता से लेते हुए प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाया है।

महावितरण/महाजेनको प्रबंधन ने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने और तकनीकी मानकों की अनदेखी करने के आरोप में दो बेहद वरिष्ठ अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के बाद से पावर स्टेशन के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

यूनिट नंबर 8 और 9 में बार-बार हो रहा था ट्यूब लीकेज

निलंबन की यह गाज पावर स्टेशन की सबसे आधुनिक और ५०० मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर ८ और ९ पर कार्यरत अधिकारियों पर गिरी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से इन दोनों यूनिट्स में लगातार तकनीकी खराबी आ रही थी। खासकर बॉयलर ट्यूब लीकेज की घटनाएं इतनी आम हो गई थीं कि प्रबंधन को बार-बार इन यूनिट्स को अचानक बंद करना पड़ रहा था। गर्मियों के इस सीजन में, जब पूरे महाराष्ट्र में बिजली की मांग अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है, तब ५००-५०० मेगावाट की दो बड़ी यूनिट्स का बार-बार ठप होना राज्य के लोड शेडिंग और बिजली नियोजन के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया था। इससे न सिर्फ पावर स्टेशन की कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे थे, बल्कि महामंडल को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा था।

मुख्य अभियंता अनिल काटोले की जांच रिपोर्ट में खुली पोल

इस लगातार आ रहे संकट को देखते हुए CTPS के मुख्य अभियंता अनिल काटोले के सीधे मार्गदर्शन में एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच समिति का गठन किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, समिति की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सेट में खराबी के कुछ बुनियादी और गंभीर तकनीकी कारणों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया था। रूटीन मेंटेनेंस में भी भारी ढिलाई बरती गई थी। इस विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधन ने अभियंता महेश पराते और अभियंता निसार मोमिन को सीधे तौर पर इस तकनीकी लापरवाही और प्रशासनिक ढिलाई का जिम्मेदार माना। इसके बाद पिछले हफ्ते ही दोनों को सस्पेंशन लेटर थमा दिया गया।

"लापरवाही की कोई जगह नहीं"— PRO अमोल बनकर ने की पुष्टि

इस संवेदनशील और बड़ी कार्रवाई के संदर्भ में जब मीडिया ने प्रबंधन का पक्ष जानना चाह, तो चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन के जनसंपर्क अधिकारी अमोल बनकर ने आधिकारिक तौर पर दोनों वरिष्ठ अभियंताओं के निलंबन की पुष्टि की।

अमोल बनकर ने सख्त शब्दों में कहा, "राज्य की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिजली उत्पादन जैसी अत्यंत आवश्यक और संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर तकनीकी लापरवाही या अनुशासनहीनता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रबंधन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और भविष्य में भी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मेंटेनेंस के नियमों को और कड़ा किया जा रहा है।" इस कार्रवाई के बाद से पावर स्टेशन के अन्य विभागों के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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