Chandrapur Municipal Corporation: चंद्रपुर महानगरपालिका की आमसभा बुधवार को भारी हंगामे के बीच संपन्न हुई थी, लेकिन बैठक के दौरान सामने आए राजनीतिक घटनाक्रम अब शहर की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहे हैं। स्वीकृत पार्षदों की नियुक्ति का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं किए जाने से भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना (युबीटी) के कई नेताओं ने नाराजगी जताई। इसके बाद कोरम को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। सूत्रों के अनुसार, बैठक से दो दिन पहले सभी दलों के गुट नेताओं ने महापौर से स्वीकृत पार्षदों की नियुक्ति का प्रस्ताव एजेंडे में शामिल करने की मांग की थी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर विपक्ष ने विरोध का रास्ता अपनाया।
इसी दौरान भाजपा में विधायक किशोर जोरगेवार समर्थक कुछ पार्षद बैठक से दूर रहे, जबकि सांसद प्रतिभा धानोरकर समर्थक कांग्रेस पार्षदों ने मनपा मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। वहीं, शिवसेना (उद्धव) के अधिकांश पार्षद भी प्रारंभ में अनुपस्थित रहे। परंतु विजय वडेट्टीवार समर्थक पार्षदों ने बाद में पहुंच कर कोरम को पूरा कर दिया था। यहीं नहीं बीएसपी पार्षद सोनिया उंदीरवाडे और निर्दलीय नंदू नागरकर भी वडेट्टीवार समर्थक पार्षदों के साथ दिखाई दिए थे। इससे सत्ता पक्ष को अप्रत्यक्ष समर्थन मिलने की चर्चा शुरू हो गई।
बताया जाता है कि आधा साल बीत जाने के बाद भी लोगों की समस्याओं पर सही ढंग से काम न होने को लेकर पार्षद परेशान है। जो काम हो रहे है उसमें पक्षपाती रवैया अपनाया जा रहा है। अभी चौधरी नामक एक पार्षद अनिश्चितकालिन भूख-हडताल पर बैठे थे। कुछ नेताओं की निजी महत्वाकांक्षा व गुटबाजी का असर पूरे शहर के विकास पर होता देख, पार्षद अंदर से संतप्त बताए जा रहे है। यह राजनीतिक नौटंकी एकबार के लिए खत्म हो जाए, इस भावना को लेकर संभवतः बेमेल गठजोड की मनपा में नए समिकरणों पर विचार होने की बात राजनीतिक जानकार कह रहे है।
बुधवार की महासभा में भाजपा-शिवसेना (युबीटी) गठबंधन के भीतर भी मतभेद की चर्चा रही। स्थायी समिति के सभापति मनस्वी संदीप गिन्हे और उपमहापौर प्रशांत दानवे प्रारंभ में बैठक में मौजूद नहीं थे। कोरम पूरा होने की जानकारी मिलने के बाद दोनों सदन में पहुंचे थे। इस घटनाक्रम ने गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।