मानव-बाघ संघर्ष (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

198 परिवारों की चीखें हैं ये! इंसान और बाघ की जंग में फेल हुआ प्रशासन; कब लागू होगी एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट?

Chandrapur Tiger Attack News: चंद्रपुर में 5 साल में 198 मौतें! बाघ-मानव संघर्ष रोकने में सरकार नाकाम। बंडू धोतरे का आंदोलन, 2021 की एक्सपर्ट कमेटी रिपोर्ट लागू करने की मांग।

प्रिया जैस

Man-Animal Conflict Maharashtra: चंद्रपुर जिले में मानव एवं वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 5 वर्ष में जिले में वन्यजीवों के हमलों में 198 लोगों की मौत हुई है, बावजूद इसके उक्त घटनाओं को रोकने के लिए गठित मानव - वन्यजीव संघर्ष तकनीकी अध्ययन समिति की सिफारिशों पर राज्य सरकार ने अभी तक अमल नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि, जिले में मानव - वन्यजीवों खासकर बाघों के बीच हो रहे संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम के लिए गठित कमेटी की सिफारिशों पर तत्काल अमल करने की मांग को लेकर पर्यावरणवादी बंडू धोतरे ने जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष यहां तीन दिनों से अन्नत्याग आंदोलन शुरू किया है। धोतरे का आरोप है कि, उक्त समिति की रिपोर्ट सरकार को पेश किए 5 वर्ष से अधिक का समय हुआ है किंतु समिति की सिफारिशों की ओर सरकार विशेषतः वन विभाग नजरअंदाज कर रहा है।

राज्य सरकार ने स्टेट वाइल्डलाइफ एडवाइजरी बोर्ड के निर्देशों पर वर्ष 2020 को चंद्रपुर के मुख्य वनसंरक्षक एन।आर। प्रवीण की अध्यक्षता में 11 सदस्यों वाली एक टेक्निकल स्टडी कमेटी बनाई थी।

कमेटी की सिफारिशों को किया नजरअंदाज

इस कमेटी में ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र निदेशक जितेंद्र रामगांवकर, वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट, देहरादून के विशेषज्ञ बिलाल हबीब, विद्या आत्रेय, वाइल्डलाइफ़ कंज़र्वेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अनीश अंधेरिया, सेवानिवृत्त अधिकारी संजय ठाकरे, गिरीश वशिष्ठ, समाजसेवी पारोमिता गोस्वामी और बंडू धोत्रे शामिल थे। इस कमिटी ने गहरे अध्ययन और ग्रामीणों से बातचीत के आधार पर 5 जनवरी 2021 को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट पर 20 अक्टूबर 2021 को हुई स्टेट वाइल्डलाइफ एडवाइजरी बोर्ड की 17 वीं मीटिंग में रिपोर्ट पर डिटेल में चर्चा हुई और इसकी सिफारिशों को मान लिया गया और लागू करने की सिफारिश की गई थी।

उपायों को नहीं अपनाया

कमेटी की रिपोर्ट स्वीकार किये जाने के बावजूद, इसमें दिए गए उपायों को अभी तक लागू नहीं किया गया है। इस कमेटी ने मानव वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति को रोकने की दिशा में कई तरह के उपाय सुझाए थे, जिनमें गांवों के आसपास, सड़कों के किनारे और सरकारी जमीन पर उगने वाली झाड़ियों और खरपतवारों को साफ करने ताकि वन्यजीवों को गांवों के पास छिपने की जगहों की संख्या कम होगी और उनकी आवाजाही पर जल्दी ध्यान दिया जा सकेगा।

गांवों में मीट की दुकानों से निकलने वाले कचरे के सही तरीके से निपटान पर भी जोर दिया गया था, ऐसा कचरा आवारा कुत्तों को गांवों की ओर खींचता है और इस तरह तेंदुए और दूसरे मांसाहारी जानवर भी इस इलाके में आ जाते हैं, गांवों की ओर जाने वाली सड़कों पर अच्छी स्ट्रीट लाइट लगाना, साथ ही किसानों के लिए कम लागत वाली सोलर फेंसिंग का इंतज़ाम करना शामिल था।

हैबिटैट मैनेजमेंट पर ज़ोर

कमेटी ने जंगल में बाघ-इंसान के टकराव को कम करने के लिए हैबिटैट मैनेजमेंट पर भी ज़ोर दिया था। साथ ही वाइल्डलाइफ़ कॉरिडोर को मज़बूत करने के लिए बांस और लोकल पेड़ लगाकर जंगल में कॉन्टैक्ट ज़ोन बनाए रखने पर भी ज़ोर दिया गया था।

औद्योगिक क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही कम करने के लिए, रिपोर्ट में उस इलाके में हैबिटैट बदलने, बाड़ लगाने और ज़रूरत पड़ने पर उस इलाके से बाघों को पकड़कर चिड़ियाघर या टाइगर सफ़ारी में ले जाने की सलाह भी दी गयी थी। बाघों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए नेटवर्क वाले कैमरा ट्रैप के ज़रिए एक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम बनाने का सुझाव दिया गया था।

धोतरे का आरोप है कि, चंद्रपुर में बाघ- मानव संघर्ष से निपटने के लिए रिपोर्ट में पूरी गाइडलाइन दी गई है, लेकिन इसे लागू न करने की वजह से समस्या विकराल बनी हुई है।गौरतलब है कि, चंद्रपुर जिले में बाघ-मानव के बीच संघर्ष में पिछले 5 वर्ष में मरने वालों की संख्या 198 से अधिक पाई गई है। इस संघर्ष में वर्ष 2021 में 44, वर्ष 2022 में 53, वर्ष 2023 में 25, वर्ष 2024 में 29 और वर्ष 2025 में 47 लोगों की मौत हो चुकी है।

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