सोयाबीन की फसल (सोर्स: सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

बेमौसम बारिश के बाद अब वन्यजीवों का कहर: सौर ऊर्जा और शॉक मशीन योजना में उलझा चंद्रपुर का किसान

Chandrapur News: चंद्रपुर में खरीफ की बर्बादी के बाद अब रबी फसलों पर जंगली सूअरों और बाघों का खतरा मंडरा रहा है। कड़ाके की ठंड में रात भर जागने को मजबूर किसान। योजनाओं की सुस्त रफ्तार से आक्रोश।

आकाश मसने

Chandrapur Wild Animal Crop Damage: चंद्रपुर जिले में खेती करना अब किसी जोखिम भरे खेल से कम नहीं रह गया है। जिले के किसान इस समय एक साथ कई मोर्चों पर जंग लड़ रहे हैं। दिन भर खेतों में हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद, अब कड़ाके की ठंड में उन्हें अपनी रातों की नींद त्यागकर फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। रबी का सीजन शुरू होते ही जंगली सूअरों और अन्य वन्यजीवों के बढ़ते हमलों ने किसानों की चिंता को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।

खरीफ की मार और रबी की उम्मीदों पर संकट

इस वर्ष जिले के किसानों के लिए कुदरत का मिजाज काफी सख्त रहा है। खरीफ सीजन के दौरान भारी बेमौसम बारिश ने सोयाबीन की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। फलियां काली पड़कर सड़ गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब रबी सीजन में गेहूं, चना, कपास और ज्वार की फसलें लहलहा रही हैं, लेकिन इन पर जंगली सूअरों के झुंडों की टेढ़ी नजर है। किसानों का कहना है कि अगर एक रात भी पहरा चूका, तो 25-30 सूअरों का झुंड घंटों में कई एकड़ फसल को तहस-नहस कर देता है।

खेतों में बाघ का डर और 'जागते रहो' की मजबूरी

चंद्रपुर जिला अपने बाघों के लिए जाना जाता है, लेकिन यही गौरव किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। रात के अंधेरे में जंगली सूअरों को भगाने के लिए किसानों को खेतों में रहना पड़ता है, जहां अक्सर बाघ और तेंदुए देखे जा रहे हैं। अपनी जान जोखिम में डालकर फसल बचाना अब किसानों की मजबूरी बन चुकी है, क्योंकि खरीफ का कर्ज चुकाने और साल भर परिवार का पेट पालने का यही एकमात्र जरिया बचा है।

सरकारी योजनाएं: 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया'

प्रशासनिक स्तर पर किसानों की सुरक्षा के लिए 'संयुक्त वन प्रबंधन समितियों' का गठन तो किया गया, लेकिन धरातल पर इनका लाभ शून्य है। सरकार ने सौर ऊर्जा संचालित बैटरियों और झटका मशीनों के वितरण की घोषणा की थी। हजारों किसानों ने इसके लिए अग्रिम राशि भी जमा की, लेकिन सीजन शुरू होने के बावजूद संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

वन विभाग की 70 प्रतिशत सब्सिडी वाली शॉक मशीन योजना भी किसानों के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। योजना की शर्त है कि किसान पहले 100 प्रतिशत राशि का भुगतान कर मशीन खरीदे, जिसके बाद सब्सिडी खाते में आएगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों के लिए एक साथ पूरी राशि जुटाना नामुमकिन है।

किसानों की मांग: राहत और सुरक्षा के ठोस उपाय

ग्रामीणों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अपनी योजनाओं की शर्तों में ढील देनी चाहिए। किसानों ने मांग की है कि उन्हें मुफ्त में सौर बैटरी, कांटेदार तार और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। केवल कागजी घोषणाओं से फसलें नहीं बचेंगी। यदि समय रहते वन विभाग और जिला प्रशासन ने कृषि सुरक्षा के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो किसानों का आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।

PM मोदी-ट्रंप की फोन पर बात, भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर क्या हुई चर्चा?

हवा में चाकूबाजी, तेजी से नीचे आया विमान…कौन हैं भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार? जान पर खेलकर बचाई 180 की जान

यूपी पुलिस को ही भंग कर सभी केस CBI को देने पड़ेंगे क्या? सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कांग्रेस की एकला चलो नीति पर भड़के उद्धव ठाकरे! INDIA गठबंधन की बैठक में सुनाई खरी-खोटी, दी ये सलाह

CSR घाेटाला: महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों के 8 ठिकानों पर ED की छापेमारी, फर्जी नेटवर्क का खुलासा