Chandrapur Development Fund: अलग-अलग संसाधनों से मिले फंड व्दारा जिले का बड़े पैमाने पर विकास किया जा रहा है। इसमें सामान्य जिला वार्षिक योजना, अनुसूचित जाति उपयोजना, अनुसूचित जनजाति उपयोजना और अन्य योजनाओं का समावेश है।
साल 2026-27 के लिए जिला नियोजन के लिए मंज़ूर किए गए नियत व्यय के अलावा, 658 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की गई है। जिला नियोजन समिति की बैठक शुक्रवार 6 फरवरी को नियोजन भवन में राज्य के आदिवासी विकास मंत्री तथा चंद्रपुर जिले के पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके की अध्यक्षता में हुई।
सरकार ने आर्थिक वर्ष 2026-27 के लिए सामान्य जिला वार्षिक योजना के लिए 358 करोड़ 89 लाख रुपये, अनुसूचित जाति योजनाओं के लिए 75 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति योजनाओं के लिए 111 करोड़ 48 लाख रुपये मंजूर किए हैं। परंतु, शुक्रवार को पालकमंत्री की अध्यक्षता में हुई जिला नियोजन समिति की बैठक में जिला वार्षिक योजना के 358 करोड़ के अलावा 450 करोड़, अनुसूचित जाति क्रियान्वयन योजना के 75 करोड़ के अलावा 58 करोड़ और अनुसूचित जनजाति क्रियान्वयन योजना के 111 करोड़ के अलावा 150 करोड़ समेत कुल 658 करोड़ की मांग की गई है।
26 सितंबर 2025 को हुई बैठक के इतिवृत्त और अनुपालन अहवाल को मंज़ूरी दी गई थी। साथ ही, साल 2025-26 के लिए जिला वार्षिक योजना के तहत मंज़ूर कामों और जनवरी 2026 के आखिर तक हुए खर्च का जायजा लिया गया। जिला वार्षिक योजना के साल 2026-27 के लिए सरकार की आर्थिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, कुल 545 करोड़ 36 लाख 82 हज़ार रुपये के खर्च का प्रारुप पेश किया गया।
इस बैठक में क्रियान्वयन यंत्रणा के ज़रिए कुल 1134 करोड़ 15 लाख 24 हज़ार रुपये की अतिरिक्त मांग की गई है। इसमें सामान्य योजना के लिए 821 करोड़ 93 लाख 73 हजार रुपये, अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए 58 करोड़ 69 लाख 69 हजार रुपये और अनुसूचित जनजाति घटक कार्यक्रम के लिए 253 करोड़ 51 लाख 82 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग है।
आदिवासी विकास मंत्री और चंद्रपुर के पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने कहा कि प्रस्तावित राज्य स्तरीय बैठक में हम जिले में विकास के कामों के लिए ज़्यादा से ज़्यादा निधि बढ़ाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि जनप्रतिनिधि का विकास के कामों पर ज़ोर देना स्वाभाविक है। अलग-अलग विभागों के प्रमुख को समिति बैठक में उठाए गए सवालों के प्रति ज़्यादा सकारात्मक होना चाहिए और अनुपालन रिपोर्ट में दी गई जानकारी तुरंत जनप्रतिनिधियों को देनी चाहिए।
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यंत्रणा को जिले की सीमा और दूसरी जगहों पर CCTV लगाने का नियोजन बनाना चाहिए। तहसील स्तर पर रेस्ट हाउस को सुसज्य और सुविधापूर्ण करना चाहिए। जिले में सिकलसेल एनीमिया और एलिफेंटियासिस को खत्म करने के लिए और असरदार मुहिम चलाना चाहिए।
यह दुख की बात है कि जिले के ज़्यादातर गांवों में श्मशान नहीं हैं। गांव में ग्राम पंचायत भवन और श्मशान घाट बनाने को विकास के कामों में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पालकमंत्री डॉ. उइके ने बिजली कनेक्शन की कमी के कारण क्षेत्रिय जलापूर्ति योजनाओं को बंद न करने की सलाह दी।
इस मौके पर विधायक क्रमश: सुधीर मुनगंटीवार (बल्लापुर), किशोर जोरगेवार (चंद्रपुर), देवराव भोंगले (राजुरा), करण देवतले (वरोरा), जिलाधिकारी विनय गौड़ा, मुख्य वनसंरक्षक एम.एन. रामानुजन, जिप के सीईओ पुलकित सिंह, जिला पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन, चंद्रपुर मनपा आयुक्त नरेश अकुनुरी, जिला नियोजन अधिकारी सुभाष कुमरे, प्रकल्प अधिकारी विकास राचेलवार, समाज कल्याण के सहायक आयुक्त विनोद मोहतुरे के साथ संबंधित विभागों के खाताप्रमुख अधिकारी मौजूद थे।