जिला परिषद प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)  
भंडारा

भंडारा में शालाएं खुलीं लेकिन 50 स्कूलों से शिक्षक ही गायब; शिक्षा समिति ने भर्ती के लिए पारित किया प्रस्ताव

Bhandara Zilla Parishad: भंडारा जिले में स्कूल खुलते ही बदहाल शिक्षा व्यवस्था सामने आई है। करीब 50 प्राथमिक स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 700 पद रिक्त हैं।

केतकी मोडक

Bhandara Zilla Parishad School Teacher Vacancy: उच्च न्यायालय के निर्देश और महाराष्ट्र शासन के आदेशानुसार मंगलवार, 30 जून से विदर्भ के सभी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो गई। जिलेभर में 'प्रवेशोत्सव' बड़े उत्साह के साथ मनाया गया और विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों सहित आवश्यक शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई; लेकिन इस बीच भंडारा जिले की शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद गंभीर तस्वीर भी सामने आई है।

जिले के करीब 50 प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है, जबकि लगभग 700 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में इन मासूम विद्यार्थियों को पढ़ाएगा कौन, यह बड़ा सवाल अब अभिभावकों ने उठाया है।

जिला परिषद स्कूलों में शिक्षकों की इस भारी कमी को लेकर जिला परिषद की शिक्षा एवं खेल समिति ने अब बेहद कड़ा रुख अपनाया है। समिति की मासिक बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, जिसके बाद शासन से रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती करने की मांग का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया। शिक्षा समिति के सभापति नरेश ईश्वरकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सदस्यों ने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों से शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

गरीब, किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों के बच्चे पूरी तरह जिला परिषद विद्यालयों पर ही निर्भर हैं, लेकिन शिक्षकों की अनुपलब्धता से उनके शिक्षा के मूल अधिकार पर ही संकट खड़ा हो गया है।

बैठक में यह भी बताया गया कि भंडारा जिले के अनेक गांवों में शिक्षक नहीं होने से अभिभावकों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। बैठक में शिक्षा समिति के सभापति नरेश ईश्वरकर के अलावा समिति सदस्य मोहन पंचभाई, देवराम रामटेके, नारायण वरठे और संदीप ताले सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि शिक्षक भर्ती का मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है।

प्रवेशोत्सव मनाना सुधार नहीं

समिति सदस्यों का स्पष्ट कहना था कि केवल हर साल प्रवेशोत्सव मनाने से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, बल्कि विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। समिति द्वारा पारित इस प्रस्ताव में महाराष्ट्र शासन से 'पवित्र पोर्टल' के माध्यम से जिले के सभी रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र अति शीघ्र नियुक्ति करने की मांग की गई है।

प्रशासनिक क्षमता का उपयोग क्यों नहीं

गौरतलब है कि इससे पहले भी नरेश ईश्वरकर ने शासन से तीखा सवाल किया था कि जब चुनाव कराने के लिए पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है, तो शिक्षकों की समय पर भर्ती करने के लिए उसी प्रशासनिक क्षमता का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने रेखांकित किया कि शासन की पहली प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का भविष्य होना चाहिए। समिति द्वारा पारित यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव अब आगामी कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

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