तुमसर नगर परिषद (सौजन्य-नवभारत) 
भंडारा

तुमसर नगर परिषद में बवाल, विशेष सभा में नगराध्यक्ष ही रहे नदारद, पार्षदों में भारी नाराजगी

Tumsar Nagar Parishad Controversy: तुमसर नगर परिषद की विशेष सभा में नगराध्यक्ष के अनुपस्थित रहने से स्वीकृत सदस्यों का चयन नहीं हो सका। पार्षदों ने जताया कड़ा रोष।

प्रिया जैस

Approved Members Selection Issue: तुमसर नगर परिषद में गुरुवार को हुआ घटनाक्रम शहर में चर्चा का विषय बन गया है। स्वीकृत सदस्यों के चयन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए विशेष सभा बुलाकर स्वयं पीठासीन अधिकारी यानी नगराध्यक्ष का अनुपस्थित रहना प्रशासनिक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। इस मामले के बाद अब सभी की निगाहें सरकार की ओर से की जाने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

राज्य सरकार के निर्देश पर स्वीकृत सदस्यों की चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए नगराध्यक्ष ने दोपहर 2 बजे सभा का आयोजन किया था। नियमानुसार एक दिन पहले पार्षदों के गुट नेताओं ने नामांकन की प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली। गुरुवार को निर्धारित समय पर मुख्याधिकारी, उपाध्यक्ष और सभी पार्षद सभागार में उपस्थित हो गए, लेकिन सभा बुलाने वाले नगराध्यक्ष ही नदारद रहे।

सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि सभा रद्द करने के संबंध में पार्षदों को पहले से कोई आधिकारिक सूचना या लिखित आदेश नहीं दिया गया।नगराध्यक्ष की इस कार्यप्रणाली पर उपस्थित पार्षदों ने कड़ा रोष व्यक्त किया है।

नियमों का उल्लंघन

पार्षदों का आरोप है कि यह न केवल नगर परिषद के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शहर के विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति घोर संवेदनहीनता भी है। एक घंटे तक इंतजार करने के बाद जब पार्षदों ने मुख्याधिकारी से कार्यवाही का विवरण (प्रोसिडिंग) लिखने का अनुरोध किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि पीठासीन अधिकारी की अनुपस्थिति में उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

बाद में मुख्याधिकारी ने नगराध्यक्ष की ओर से जिलाधिकारी को भेजा गया एक पत्र दिखाया, जिसमें सभा स्थगित करने का उल्लेख था। विपक्षी पार्षदों का कहना है कि यदि नगराध्यक्ष किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो पा रहे थे, तो नियमानुसार उन्हें उपनगराध्यक्ष को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए थी।

जानबूझकर सभा में अनुपस्थित रहकर प्रशासनिक गतिरोध पैदा करने के इस कृत्य को पार्षदों के समय का अपमान बताया जा रहा है। जानकारों के अनुसार, पीठासीन अधिकारी को केवल गुट नेताओं की ओर से दिए गए सीलबंद लिफाफे स्वीकार कर जिलाधिकारी को सौंपने थे। अब इस मामले में जिलाधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करने की तैयारी की जा रही है, जिससे इस विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है।

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