Tumsar-Bapera Highway: तुमसर से बपेरा तक का राष्ट्रीय राजमार्ग अब आम जनता के लिए मौत का सफर बन चुका है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण रोजाना राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हुए सात वर्ष बीत चुके हैं और कई बार इसका भूमिपूजन भी किया जा चुका है, लेकिन सड़क की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है, जिससे कुछ ही घंटों में गड्ढे फिर से उभर आते हैं।
यह सड़क दो राज्यों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, परंतु इसकी जर्जर स्थिति के कारण फोर-लेन का सपना देख रहे कई ग्रामीण अब तक अपनी जान गंवा चुके हैं। आपात स्थिति में किसी मरीज को सिहोरा या ग्रामीण इलाकों से तुमसर तक ले जाना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस मार्ग से सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि कई बार चांदपुर मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में आते-जाते हैं, लेकिन जनता की इस विकराल समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
छह महीने पहले चूल्हाड़ बस स्टॉप पर राजेंद्र बघेले और विनेश गजभिये ने भी भूख हड़ताल की थी। हालांकि, उस समय जनप्रतिनिधियों की ओर से केवल आश्वासन देकर आंदोलन को समाप्त करवा दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस सड़क निर्माण का कार्य केसीसी नामक कंपनी को सौंपा गया है और सिंदपुरी में कंपनी का सेटअप भी बना है, फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों की इस अनदेखी को लेकर क्षेत्र की जनता में भारी रोष व्याप्त है।
तुमसर के पूर्व सभापति कलाम शेख ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यह सड़क नहीं, बल्कि आम जनता के लिए बनाया गया मौत का कुआं है। यहाँ के सांसद और विधायक धृतराष्ट्र की भूमिका में हैं, जिन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी है और जनता को बदहाल स्थिति में छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं इस जर्जर सड़क के कारण हादसे का शिकार हो चुके हैं। यदि इस मार्ग का निर्माण कार्य और मरम्मत तुरंत शुरू नहीं की गई, तो सिहोरा में फिर से उग्र आंदोलन किया जाएगा।