भंडारा की गणेश प्रतिमाएं (फोटो नवभारत) 
भंडारा

'एक गांव एक गणपति' पहल बनी सफल, 55 गांवों में सामाजिक सद्भाव का संदेश

Bhandara Ganeshotsav: भंडारा जिले की साकोली तहसील में 'एक गांव एक गणपति' पहल को ग्रामीणों का भरपूर समर्थन मिला। इस सामाजिक पहल ने गणेशोत्सव को एकता, समरसता और शांति का प्रतीक बना दिया।

आकाश मसने

One Village One Ganpati Initiative: महाराष्ट्र राज्य के प्रथम देवता श्री गणेश का आगमन इस वर्ष भी परंपरागत रूप से गांव-गांव में धूमधाम से हुआ है। लेकिन भंडारा जिले की साकोली तहसील में गणेशोत्सव का माहौल एक खास सामाजिक संदेश के साथ और भी जीवंत हो उठा है। प्रशासन की 'एक गांव एक गणपति' पहल को इस वर्ष ग्रामीणों का व्यापक समर्थन मिला है, जिससे यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और एकजुटता का भी प्रतीक बन गया है।

प्रशासन द्वारा पिछले कुछ वर्षों से 'एक गांव एक गणपति' की योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों में सार्वजनिक गणेशोत्सव के दौरान होने वाली अनावश्यक प्रतिस्पर्धा को टालना, समाज में सामूहिकता की भावना को मजबूत करना और उत्सव को शांति व सद्भाव से संपन्न कराना है। इस वर्ष, इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

बढ़ती हुई संख्या: एक सकारात्मक संकेत

साकोली तहसील में कुल 85 गांव हैं। पुलिस प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष इन 85 गांवों में से 55 गांवों में 'एक गांव एक गणपति' की परंपरा स्थापित की गई है। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, क्योंकि पिछले वर्ष यह संख्या 48 थी। यानी इस बार सात और गांवों ने इस समाजोपयोगी उपक्रम को अपनाया है, जिससे यह आंदोलन और भी मजबूत हुआ है। हालांकि, 41 गांवों में अब भी एक से अधिक सार्वजनिक गणपति प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, लेकिन लगातार बढ़ती हुई संख्या प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि ग्रामीण समुदाय इस पहल को धीरे-धीरे स्वीकार कर रहा है।

धार्मिक उत्सव के साथ समाजोपयोगी उपक्रम

जिन गांवों ने 'एक गांव एक गणपति' की परंपरा को अपनाया है, वहां उत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रह गया है। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ विभिन्न समाजोपयोगी उपक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। कई स्थानों पर स्वच्छता अभियान, रक्तदान शिविर, पर्यावरण जनजागरण और महिला सशक्तिकरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, बच्चों में जागरूकता बढ़ाने के लिए बालसभा और विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन हो रहा है।

ग्रामीणों का मानना है कि इस पहल से न केवल अनावश्यक खर्चों की बचत होती है, बल्कि गांव में एकजुटता भी मजबूत होती है। सभी नागरिक मिलकर एक ही उत्सव में सहभागी बनते हैं, जिससे आपसी भाईचारा बढ़ता है। यह पहल गणेशोत्सव को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान से कहीं आगे ले जाकर सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता का माध्यम बना रही है।

अग्रणी गांवों ने दिया नेतृत्व

इस वर्ष 'एक गांव एक गणपति' योजना को सफलतापूर्वक अपनाने वाले प्रमुख गांवों में बोडदे, पापड़ा, सतलवाड़ा, तुडमापुरी, किटाडी, वलमाझरी, केसलवाड़ा, खांबा, उकारा बोदरा, निलज, पडसपानी, वडेगांव, सालई, वांगी, विरसी, खैरलांजी, पाथरी, जाभंडी/सड़क, साखरा, मौखे किन्ही, पलसगांव, चिचटोला, चारगांव, विहीरगांव, उमरी, सराटी, खंडाला, लवारी, आमगांव, गढ़कुंभली, सुंदरी, खैरी, उमरी, बाम्पेवाडा, बोडे, मक्कीटोला, वाघोली, महलगांव, आमगांव खुर्द, घानोड, परसटोला, वांगी चिंगी, आतेगांव, उमरझरी, मिरेगांव, वटेश्वर, किन्ही मोखे, कुंभली, धर्मापुरी, सितेपार, परसोडी और बोरगांव शामिल हैं।

इन गांवों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से यह साबित कर दिया है कि धार्मिक आस्था को सामाजिक एकजुटता के साथ मिलाकर एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेगा, जिससे गणेशोत्सव सही मायने में एक जन-उत्सव बन सकेगा।

MLC Election Results: सभी सीटों के परिणाम जारी, यहां देखें पूरी लिस्ट; नागपुर और वाराणसी में फंसा पेच

Cyclone Arnab Update: 150 किमी/घंटा की रफ्तार से चलीं हवाएं, अब इन राज्यों में बारिश की चेतावनी

6,337 वाली दवा अब 1,495 में मिलेगी, कैंसर की किन दवाओं के कितने घटे दाम? देखें लिस्ट

BIG BREAKING: CJP ने दिया कांग्रेस के 1 नवंबर की महारैली को समर्थन, अभिजीत दिपके ने किया ऐलान

Seva First Innovation: महाराष्ट्र में इनोवेशन चैलेंज की धूम, 7,952 नए विचार पेश; 30 अक्टूबर तक करें आवेदन