Bhandara Nagzira Tiger Reserve Conflict ( Source: Social Media ) 
भंडारा

भंडारा नवेगांव-नागझिरा से दो महीने में दो बाघ 'लापता', टाइगर रिजर्व में बदलता संतुलन, विशेषज्ञों की बढ़ी चिंता

Bhandara NNTR Tiger Missing: नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व में नर बाघ ‘पांगडी’ और एक बाधिन के लापता होने से चिंता बढ़ी है। इसी क्षेत्र में ‘जांभडी’ नामक नए नर बाघ की सक्रियता दर्ज की गई है।

अंकिता पटेल

Bhandara Nagzira Tiger Reserve Conflict: भंडारा नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व (NNTR) में बीते दो महीनों के दौरान एक प्रमुख नर बाघ 'पांगडी' और एक बाधिन के कथित रूप से लापता होने की खबर ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

इसी बीच पांगडी के क्षेत्र में 'जांभडी' नामक एक नए शक्तिशाली नर बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिसने तेजी से अपना प्रभाव स्थापित कर लिया है। गोंदिया की स्वयंसेवी संस्था 'सेवा' (SEWA) ने इस बदलती गतिविधि को गंभीर मानते हुए क्षेत्र संचालक को पत्र लिखकर तत्काल समीक्षा बैठक बुलाने की मांग की है।

संस्था के अनुसार, 656.36 वर्ग किमी कोर और 1241.24 वर्ग किमी बफर क्षेत्र वाले इस रिजर्व में बाघों के प्रादेशिक संतुलन में तेजी से बदलाव हो रहा है, जिससे आपसी संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है।

संस्था अध्यक्ष सावन बाहेकर ने बताया कि पांगडी जैसे शक्तिशाली नर बाघ का बिना किसी संघर्ष के अचानक गायब होना असामान्य है। वहीं, आनुवंशिक विविधता बढ़ाने के उद्देश्य से लाई गई बाधिन 'एनटी-3' भी पिछले छह महीनों से दिखाई नहीं दी है, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए नर के आने पर पुराने नर के शावकों पर खतरा बढ़ जाता है।

वन विभाग ने लापता होने से किया इनकार

NNTR क्षेत्र उपसंचालक एवं उप वन संरक्षक प्रीतमसिथ कोडापे ने बताया कि इस वर्ष जनवरी में अखिल भारतीय बाघ गणना (AITE) के दौरान यांगडी (T-33) के फोटो कैमरा ट्रैप में कैद हुए है, जिससे उसकी उपस्थिति की पुष्टि होती है।

उन्होंने कहा कि बाघों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाना स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसलिए उन्हें लापता कहना उचित नहीं है, एनटी-3 बाधिन के संबंध में उन्होंने बताया कि उसका अधिवास गोंदिया क्षेत्र में है, जहां बाघ गणना कार्य जारी है।

संभावना है कि गणना पूर्ण होने पर उसकी उपस्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने बताया की कई बार बाघ एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पलायन करते रहते है जो एक नैसर्गिक क्रिया है।

ऐसे में बाघों को लापता कहना गलत होगा, साथ ही, बफर क्षेत्र का नियंत्रण हाल ही में NNTR प्रशासन को मिलने से आने वाले समय में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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