Leopard Rescue (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया) 
भंडारा

भंडारा में नहर में फंसी मादा तेंदुए का सफल रेस्क्यू, तीन घंटे चला अभियान

Bhandara Leopard Rescue Operation News: भंडारा जिले के उमरी चौ। ईसापुर गांव के पास नहर में फंसी मादा तेंदुए को वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने तीन घंटे के अभियान के बाद सुरक्षित बचाया।

महाराष्ट्र डेस्क

Bhandara Forest Department News: सूचना मिलते ही वन विभाग, शीघ्र बचाव दल आरआरटी और स्थानीय नागरिकों की मदद से करीब तीन घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद तेंदुए को सुरक्षित पकड़ा गया। पुलिस पाटिल की सतर्कता से शुरू हुआ अभियानसुबह करीब 5।45 बजे उमरी चौ। के पुलिस पाटिल प्रफुल सावरबांधे को गांव के पास नहर में तेंदुआ होने की जानकारी मिली।

उन्होंने तुरंत इसकी सूचना अड्याल वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही सहायक वनसंरक्षक सचिन निलख, वनपरिक्षेत्र अधिकारी योगेश शर्मा, वनरक्षक तथा शीघ्र बचाव दल की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। मौके पर जुटी भारी भीड़तेंदुए को देखने के लिए घटनास्थल पर करीब 200 से 300 नागरिकों की भीड़ जमा हो गई थी।

ईसापुर गांव के पास नहर में मिला तेंदुआ

किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए वन विभाग ने भीड़ को नियंत्रित कर लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए। इस तरह किया गया रेस्क्यूवन अधिकारियों और बचाव दल ने पहले नहर में फंसे तेंदुए की गतिविधियों का निरीक्षण किया। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत नहर के एक हिस्से को पूरी तरह बंद कर दूसरी ओर लोहे का पिंजरा लगाया गया। कुछ देर बाद तेंदुआ पिंजरे में प्रवेश कर गया, जिसके बाद वन विभाग ने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। डेढ़ से दो वर्ष की मादा तेंदुआ निकली स्वस्थपकड़े गए तेंदुए को आगे की जांच के लिए अड्याल वनपरिक्षेत्र कार्यालय लाया गया, जहां पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मिसलवार ने उसकी मेडिकल जांच की।

मेडिकल जांच के बाद स्वस्थ पाई गई मादा तेंदुआ

जांच में पता चला कि तेंदुआ लगभग डेढ़ से दो वर्ष उम्र की मादा है और पूरी तरह स्वस्थ है। पशु चिकित्सकों की सलाह के बाद उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इससे पहले भी चला था सफल अभियानउल्लेखनीय है कि अड्याल वनपरिक्षेत्र में यह दूसरा सफल रेस्क्यू अभियान है।

इससे पहले 1 मई को खापरी गांव के पास एक बंद नाले से मादा तेंदुए और उसके दो शावकों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ा गया था। इस अभियान में उपवनसंरक्षक योगेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में सहायक वनसंरक्षक सचिन निलख, वनपरिक्षेत्र अधिकारी योगेश शर्मा, जीवशास्त्री शुभम मोदनकर, वनरक्षक निलेश श्रीरामे सहित वन विभाग और शीघ्र बचाव दल के कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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