कॉलेज विद्यार्थी  प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
भंडारा

भंडारा में D.Ed की सरकारी सीटों पर विद्यार्थियों का भरोसा, 397 में 395 भरीं, निजी कोटे की 30 सीटें खाली

Bhandara Colleges News: भंडारा के 8 डीएड कॉलेजों में सरकारी कोटे की 397 में 395 सीटें भर गईं, जबकि निजी व्यवस्थापन कोटे की 90 में 30 सीटें रिक्त हैं। कॉलेजों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है

प्रमोद यादव

Bhandara Colleges D.Ed Admission Government Quota: भंडारा जिले में इस वर्ष अध्यापक शिक्षा (डीएड) पाठ्यक्रम में प्रवेश को लेकर शासकीय कोटे की सीटों को विद्यार्थियों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। जिले के 8 डीएड कॉलेजों में शासकीय स्तर पर निर्धारित 397 सीटों में से 395 सीटें भर चुकी हैं, केवल दो सीटें रिक्त रह गई हैं।

इसके विपरीत निजी डीएड कॉलेजों के व्यवस्थापन कोटे की सीटों को विद्यार्थियों का अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिल पाया है और 30 सीटें खाली रह गई हैं। इससे निजी कॉलेजों के सामने आर्थिक और शैक्षिक व्यवस्था को लेकर चुनौती खड़ी हो गई है।

भंडारा जिले में डीएड कॉलेज

भंडारा जिले में कुल आठ डीएड कॉलेज संचालित किए जाते हैं। इनमें एक शासकीय डीएड कॉलेज है, जबकि सात कॉलेज निजी व्यवस्थापन के तहत चलाए जा रहे हैं। निजी कॉलेजों में व्यवस्थापन कोटे के तहत कुल 90 सीटें निर्धारित की गई थीं।

इनमें से केवल 60 सीटों पर ही प्रवेश हो पाया है। अभी भी 30 सीटें रिक्त हैं। शासकीय कोटे में लगभग सभी सीटें भर जाने और व्यवस्थापन कोटे में बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से प्रवेश व्यवस्था में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।

फीस का बोझ प्रमुख कारण

भंडारा जिले में इस वर्ष अध्यापक शिक्षा के व्यवस्थापन कोटे की सीटें रिक्त रहने के पीछे सबसे बड़ा कारण विद्यार्थियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ माना जा रहा है। निजी कॉलेजों में व्यवस्थापन कोटे की फीस शासकीय कोटे की तुलना में अधिक होने से कई विद्यार्थी प्रवेश लेने से पीछे हट रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी कम खर्च में डीएड शिक्षा प्राप्त करने के लिए शासकीय कोटे को प्राथमिकता दे रहे हैं।

रोजगार के अवसरों को लेकर असमंजस

डीएड करने के बाद रोजगार के अवसरों को लेकर विद्यार्थियों में असमंजस भी एक कारण माना जा रहा है। शिक्षक भर्ती की स्थिति, भर्ती प्रक्रिया में लगने वाला समय और रोजगार की अनिश्चितता के कारण कुछ विद्यार्थी डीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के बजाय अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले कई सालों में शिक्षकों की भर्ती को लेकर काफी समस्या रही है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया के कारण विद्यार्थी शासकीय कोटे को पहली पसंद बना रहे हैं। हमारी प्राथमिकता सभी प्रशिक्षुओं को उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण और बेहतर प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे भविष्य के कुशल शिक्षक बन सकें। निजी संस्थानों को भी फीस संतुलन और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। -
राजेश रुद्रकार (प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट, भंडारा)

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